Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी 2026 में कब ? नोट करें डेट, पितृ दोष से मुक्ति पाने का श्रेष्ठ दिन


Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ तिथि मानी जाती है, जिसे वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है. इस साल गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026 को है. इस दिन को “गंगा जयंती” भी कहा जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा का पुनः प्राकट्य हुआ था.

गंगा सप्तमी 2026 मुहूर्त

वैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि प्रारम्भ- 22 अप्रैल 2026 को रात 10:49 बजे शुरू होगी और अगले दिन 234 अप्रैल को रात 8.49 पर समाप्त होगी. चूंकि ये त्योहार उदयातिथि से मान्य होता है इसलिए 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी मनाई जाएगी.

  • गंगा सप्तमी मध्याह्न मुहूर्त – सुबह 11:01 – दोपहर 01:38 पी एम
  • स्नान समय- सुबह 5.48 – सुबह 7.26

पितरों का उद्धार का दिन

धार्मिक दृष्टि से यह दिन पितरों के उद्धार के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करके तर्पण और दान करने से पितरों को शांति मिलती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.

गंगा सप्तमी के दिन विशेष रूप से हरिद्वार में मां गंगा का जन्मोत्सव मनाया जाता है और ढोल नगाड़ों के बीच मां गंगा की शोभायात्रा निकाली जाती है. ऐसे में इस दिन मां गंगा की पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और लोगों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

गंगा सप्तमी की कथा

गंगा नदी हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और अनेक धर्मग्रंथों में गंगा महत्व का वर्णन देखने को मिलता है. शास्त्रों के अनुसार वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मां गंगा का पुन: जन्म हुआ था. गंगा का जन्म ब्रह्मदेव के कमंडल से हुआ. इस दिन गंगा मां ने अपने जल से विष्णु जी की वंदना की थी। इसके बाद, उन्होंने अपना स्थान स्वर्ग में बना लिया था.

स्कंद पुराण और पद्म पुराण में वर्णित है कि इस दिन गंगा स्नान करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.

गंगा सप्तमी पर क्या करें

  • इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. यदि संभव हो तो गंगा नदी में स्नान करें, अन्यथा घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यदायक माना जाता है.
  • स्नान के बाद मां गंगा की विधिपूर्वक पूजा करें और उन्हें फूल, दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित करें. गंगा स्तोत्र या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि भगवान शिव से गंगा का गहरा संबंध है.
  • इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है-जैसे अन्न, वस्त्र, जल, या धन का दान जरूरतमंदों को करना चाहिए.
  •  पितरों की शांति के लिए तर्पण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है.
  • शाम के समय गंगा किनारे या घर में ही दीपदान करना आध्यात्मिक शांति और पुण्य बढ़ाता है.

गंगा सप्तमी पर क्या न करें

  • गंगा को पवित्र मानते हुए नदी या जल स्रोत को गंदा नहीं करना चाहिए – जैसे प्लास्टिक, कचरा या अपशिष्ट डालना.
  • मांसाहार और शराब का सेवन इस दिन वर्जित माना गया है, क्योंकि यह शुद्धता के नियमों के विपरीत है.
  • किसी भी प्रकार का अपवित्र या नकारात्मक कार्य नहीं करना चाहिए, जैसे झूठ बोलना, क्रोध करना या किसी का अपमान करना.
  • घर में भी अशांति, कलह या विवाद से दूर रहना चाहिए.

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