Personal Loan Prepayment: अक्सर लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्सनल लोन लेते हैं और बाद में जब उनके पास अतिरिक्त पैसा आता है तो वे इसे समय से पहले चुकाने का प्लान भी करते हैं. अगर आप भी पर्सनल लोन की प्रीपेमेंट करने की योजना बना रहे हैं, तो बिना सोचे-समझे फैसला लेने के बजाय इससे जुड़ी जरूरी बातों को जान लेना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.
प्रीपेमेंट कुछ मामलों में आपके ब्याज के बोझ को कम कर सकती है. लेकिन हर स्थिति में यह सही विकल्प नहीं होता. कई बैंक समय से पहले लोन चुकाने पर अतिरिक्त शुल्क भी वसूलते हैं. जिससे कुल बचत पर असर पड़ता है. आइए जानते हैं इसके बारे में…
लोन के शुरुआती दौर में ज्यादा फायदा
पर्सनल लोन की प्रीपेमेंट का असली फायदा तब मिलता है जब आप इसे लोन की शुरुआत में ही कर देते हैं. अगर लोन लिए कुछ ही महीने या करीब एक साल हुआ है, तो उस समय प्रीपेमेंट करने से आप अच्छी-खासी ब्याज राशि बचा सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि शुरुआती अवधि में आपकी EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज के रूप में जाता है.
वहीं अगर आपका लोन खत्म होने के करीब है और केवल कुछ महीने या एक साल का समय बचा है, तो प्रीपेमेंट करने का फायदा बहुत कम रह जाता है. उस समय तक आप ज्यादातर ब्याज दे चुके होते हैं. इस समय लोन जल्दी चुकाने से खास बचत नहीं होती या फिर बहुत कम होती है.
प्रीपेमेंट चार्ज का गणित समझना जरूरी
लोन से संबंधित सभी जानकारी पहले ही ले लेनी चाहिए. आमतौर पर बैंक प्रीपेमेंट पर बकाया रकम का करीब 2 से 5 प्रतिशत तक शुल्क लेते हैं. जिससे कुल खर्च बढ़ सकता है. इसलिए यह देखना जरूरी है कि आपको ब्याज में जितनी बचत हो रही है, वह इस चार्ज से ज्यादा है या नहीं.
कई बार ऐसा होता है कि प्रीपेमेंट फीस ही ज्यादा पड़ जाती है, ऐसे में जल्दबाजी में लोन चुकाना फायदे के बजाय नुकसान का सौदा बन सकता है. अगर आपका लोन खत्म होने वाला है और आप आसानी से ईएमआई का भुगतान कर पा रहे हैं तो सलाह दी जाती है प्रीपेमेंट करने से बचना चाहिए.