Harish Rana पर बनेगी फिल्म, 13 साल से तक कोमा में रहे, सुप्रीम कोर्ट से मिली इच्छा मृत्यु की अनुमति

aeb28dd0076cd7797815e2223b19af5817743626624731372 original


Show Quick Read

Key points generated by AI, verified by newsroom

13 साल तक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हरीश राणा को अब मुक्ति मिल गई है. आज 24 मार्च को उनका निधन हो गया है, जिनकी कहानी को अब बड़े पर्दे पर दिखाने की तैयारी हो रही है. यह सिर्फ एक इंसान की नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की कहानी है जिसने हर दिन दर्द और उम्मीद के साथ जीना सीखा. सुप्रीम कोर्ट के इच्छामृत्यु जैसे बड़े फैसले के बाद यह मामला पूरे देश में चर्चा में आ गया था. अब इस कहानी को फिल्म के जरिए लोगों तक पहुंचाने की कोशिश हो रही है, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर सकती है.

13 साल बाद मिली इच्छामृत्यु की अनुमति 

बताया जा रहा है कि मुंबई के एक लेखक ने हरीश राणा की जिंदगी पर फिल्म बनाने की इच्छा जताई है. इसके लिए उन्होंने हरीश के वकील मनीष जैन से संपर्क भी किया है. इस कहानी में सिर्फ एक मरीज की तकलीफ ही नहीं, बल्कि उसके परिवार का संघर्ष, वकील की मेहनत और न्याय की प्रक्रिया को भी दिखाया जाएगा. 13 साल तक अपने बेटे को उसी हालत में देखना माता-पिता के लिए बहुत मुश्किल था. जब अदालत ने इच्छामृत्यु की अनुमति दी, तो यह फैसला हर किसी को इमोशनल कर गया. साथ ही अंगदान का फैसला इस कहानी को और भी खास बनाता है. 

इंजीनियरिंग के समय हुआ बड़ा हादसा 

बता दें, हरीश राणा की कहानी हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के छोटे से गांव प्लेटा से शुरू होती है. उनके पिता अच्छी जिंदगी के लिए 1989 में दिल्ली आ गए थे. परिवार खुशी-खुशी जीवन बिता रहा था, लेकिन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान एक हादसे ने सबकुछ बदल दिया. हरीश कोमा में चले गए और फिर ठीक नहीं हो पाए. हालांकि आज उन्हें 13 साल की पीड़ा से मुक्ति मिल गई है. कई साल इलाज और उम्मीद के बाद भी जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो माता-पिता ने भारी दिल से इच्छामृत्यु का फैसला लिया था. करीब तीन साल तक कानूनी लड़ाई चलने के बाद सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिली थी. अब यही कहानी फिल्म के रूप में सामने आने वाली है, जो जिंदगी, दर्द और सम्मानजनक विदाई का मतलब समझाएगी.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *