Indian Rupee Fall: भारतीय करेंसी में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. शुक्रवार के कारोबारी दिन रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ. रुपया पहली बार 94 के पार चला गया. दिन के दौरान यह गिरकर 94.84 तक पहुंच गया था, जबकि कारोबार के अंत में 94.81 पर बंद हुआ.
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और ईरान में बढ़ते तनाव का असर रुपये पर साफ दिखाई दे रहा है. आंकड़ों की बात करें तो, इस वित्त वर्ष में अब तक रुपया करीब 11 प्रतिशत तक कमजोर हो चुका है. भारतीय करेंसी का यह हाल पिछले एक दशक से ज्यादा समय में किसी भी वित्त वर्ष के मुकाबले सबसे कमजोर माना जा रहा है. आइए जानते हैं, इस विषय में…
रुपये में गिरावट की वजह
1. रुपये में हो रही गिरावट के पीछे विशेषज्ञ कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे बदलाव को बता रहे हैं. विषय की समझ रखने वाले जानकारों का कहना है कि, आने वाले कई सप्ताहों तक कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर रह सकती है. जिससे देश में महंगाई का खतरा बढ़ने वाला है. जिसका सीधा असर रुपये पर देखने को मिल रहा है.
2. वहीं दूसरी ओर विदेशी निवेशक भारतीय घरेलू बाजार से लगातार दूरी बना रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने आखिरी एक महीने में करीब 13 अरब डॉलर की निकासी भारतीय शेयर बाजार से की है. जिसकी वजह से भी रूपया लगातार टूट रहा है.
3. मिडिल ईस्ट में पैदा हुए तनाव से भी रुपया पर दबाव बना हुआ है. युद्ध की शुरूआत से अब तक रुपया करीब 4 फीसदी तक फिसल गया है. जारी अनिश्चित भरे माहौल के बीच रुपये की इस गिरावट ने निवेशकों का भरोसा डगमगाने का काम किया है.
आगे कैसी रहेगी रुपये की चाल?
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब तक ईरान-इजरायल के बीच जारी यह युद्ध रुक नहीं जाता, तक तक रुपये में बड़ी रिकवरी की उम्मीद कम है. हालांकि, सरकार अपने स्तर से रुपये को सपोर्ट देने में लगी हुई है.
पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाने का फैसला लिया है. जिससे आम लोगों को कुछ राहत मिल सकती है. हालांकि, इस कदम का असर सरकारी खजाने पर पड़ सकता है और सरकार के राजस्व में कमी आने की संभावना होगी.
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