Rupee Hits Record Low: डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रुपया


Rupee Hits Record Low: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आज रुपये में बड़ी गिरावट देखी जा रही है. आज 27 मार्च को रुपया डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर पर गिरकर 94.28 रुपये प्रति डॉलर के पार पहुंच गया है.  

क्यों डॉलर से इतना पिछड़ा रुपया? 

  • अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग खत्म होने का कोई नाम ही नहीं है. युद्ध और लंबा खींचने की आशंका से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है. ाारत अपनी जरूरत का लगभग 88 परसेंट तेल आयात करता है. ऐसे में डॉलर की मांग एकाएक बढ़ गई है.
  • वैश्विक अनिश्चितता के इस माहौल में निवेशक भारतीय शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे निवेश से पैसा निकालकर अमेरिकी डॉलर में लगा रहे हैं. इससे भी डॉलर की मांग बढ़ी है. डॉलर को एक ‘सेफ हेवेन’ के तौर पर देखा जाता है.
  • विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय शेयर बेचकर निकल रहे हैं. ईरान में जंग शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगभग 5 अरब डॉलर से 8 अरब डॉलर की बिकवाली की है. 
  • ईरान ने अमेरिका के सामने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संप्रभु नियंत्रण की शर्त रखी है. इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को ईरान के बंद करने की धमकी से एनर्जी सप्लाई को लेकर सवालिया निशान खड़ हो गए हैं, जिससे निवेशक डरे हुए हैं. 

आम आदमी पर असर

  • डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होगा, तो क्रूड से लेकर एडिबल ऑयल, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स महंगे हो जाएंगे क्योंकि भारत इन चीजों का बड़े पैमाने पर आयात करता है, जिसका भुगतान डॉलर में होता है. रुपया कमजोर होगा, तो भारत को डॉलर के मुकाबले अधिक भुगतान करना होगा. 
  • आमतौर पर महंगाई बढ़ती है, तो उसे काबू में लाने के लिए RBI आने वाले समय में रेपो रेट बढ़ा सकता है. इससे लोन पर आपकी EMI महंगी हो सकती है. 
  • रुपये के गिरने से विदेशी यात्रा और विदेश में पढ़ाई या मेडिकल ट्रीटमेंट पर खर्च बढ़ सकता है क्योंकि अब डॉलर के मुकाबले अधिक रुपये देने होंगे.

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