HDFC बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे पर बड़ी खबर, इस वजह से एकाएक छोड़ी अपनी जिम्मेदारी

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HDFC Bank: HDFC बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक के चीफ एग्जीक्यूटिव शशिधर जगदीशन के साथ सत्ता को लेकर खींचतान के चलते अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दिया. इस खबर से देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक में लीडरशिप की स्थिरता को लेकर नए सवाल हो गए हैं. FT ने इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से बताया कि महीनों से सुलग रहा यह तनाव मुख्य रूप से रणनीतिक मतभेदों, गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों और CEO के जल्द होने वाले दोबारा अपॉइंटमेंट पर केंद्रित था.

बता दें कि पिछले हफ्ते 18 मार्च को अतनु चक्रवर्ती ने अचानक से अपना इस्तीफा दे दिया. अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने बैंक के कुछ ऐसी कार्यप्रणालियों का जिक्र किया, जो उनकी नैतिकता और सिद्धांतों के खिलाफ है. अब सामने आ रही मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनका यह इस्तीफा सीईओ शशिधर जगदीशन के साथ मतभेदों का परिणाम है. रिपोर्ट के मुताबिक, अतनु सीईओ जगदीशन का कार्यकाल आगे बढ़ाए जाने के पक्ष में नहीं थे, जबकि बोर्ड के अधिकतर सदस्यों ने इसका समर्थन किया.

पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे ने मचाई हलचल

अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे पर बीते दिनों बैंक के अंतरिम चेयरमैन केकी मिस्त्री और खुद सीईओ जगदीशन ने बोर्डरूम में किसी तरह के सत्ता संघर्ष या गंभीर विवाद की खबरों को सिरे से नकार दिया था. बैंक ने मामले की जांच के लिए दो बाहरी लॉ फर्मों की नियुक्ति भी की थी ताकि नैतिकता को लेकर अतनु के सवालों की जांच हो सके. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी मामले का संज्ञान लिया. इधर, अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे देने का बाजार में कुछ ऐसा असर हुआ कि HDFC बैंक के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई. शेयर 52-वीक के अपने सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गए. बैंक की मार्केट वैल्यू में भी 1 लाख करोड़ रुपये ये ज्यादा की गिरावट आई. 

अब सामने आएगी सच्चाई 

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC बैंक ने अतनु चक्रवर्ती के जाने से जुड़ी परिस्थितियों की कानूनी समीक्षा शुरू कर दी है. इस मामले से परिचित लोगों ने ET को बताया कि बैंक ने इस मुद्दे की जांच के लिए वाडिया गांधी और ट्राईलीगल जैसी लॉ फर्मों के साथ-साथ एक अंतरराष्ट्रीय फर्म को भी नियुक्त किया है.

इस समीक्षा में पिछले दो वर्षों की बोर्ड की कार्यवाही की बारीकी से जांच की जाएगी – जिसमें रिकॉर्डिंग, मिनट्स और एजेंडा शामिल हैं – ताकि यह पता लगाया जा सके कि चक्रवर्ती के कार्यकाल के दौरान शासन या नैतिक आचरण से संबंधित कोई चिंताएं उठाई गई थीं या नहीं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें बोर्ड तक पहुंचाई गई व्हिसलब्लोअर शिकायतों को भी शामिल किया जाएगा और यह आकलन किया जाएगा कि उन शिकायतों को कैसे निपटाया गया.

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