रिश्तों में माइक्रोचीटिंग क्या होती है, जानें इसके 2 प्रकार और कौन सा कम नुकसानदायक?


आजकल रिश्तों में सिर्फ बड़ी बेवफाई ही नहीं होती है , बल्की अपने पार्टनर को धोखा देने के कई तरीके हो सकते हैं, और हर बार इसका नतीजा एक जैसा नहीं होता बल्कि छोटी छोटी हरकतें भी रिश्तों में भरोसे को कमजोर कर सकती हैं, जिन्हें आमतौर पे माइक्रोचीटिंग कहा जाता है. पोर्टलैंड के एक रिलेशनशिप काउंसलर Jeff Guenther ने बताया की यह ऐसे व्यवहार होते हैं जो सीधे तौर पर धोखा नहीं लगते है, लेकिन कहीं न कहीं पार्टनर के भरोसे को कमजोर करने की ताकत रखते हैं.

माइक्रोचीटिंग क्या है?

Jeff Guenther बताते हैं कि माइक्रोचीटिंग का मतलब है वो छोटी छोटी हरकतें जिन्हें पूरी तरह धोखा तो नहीं कहा जाता, लेकिन  लगता है कि इंसान अपने पार्टनर के प्रति पूरी तरह वफादार नहीं है, जैसे एक्स से छुपकर बात करना, किसी और से फ्लर्ट करना और सोशल मीडिया पर किसी खास व्यक्ति में ज्यादा दिलचस्पी लेना. उनके अनुसार, ये चीजें भले ही छोटी लगें, लेकिन ये रिश्ते में दूरीयां पैदा करती है  उनके अनुसार  ये दो तरह की होती हैं और दोनों का असर भी अलग अलग होता है. 

यह भी पढ़ेंः क्या लव हार्मोन का नेजल स्प्रे लेकर जिंदगी को बना सकते हैं रोमांटिक, जानें स्टडी में क्या आया सामने?

माइक्रोचीटिंग के 2 प्रकार 

  • Jeff Guenther ने माइक्रोचीटिंग को दो हिस्सों में बांटा है, जिनका असर रिश्ते पर अलग-अलग पड़ता है, पहला तरीका चालाकी और धोखे वाला है जिससे दूर रहना चाहिए, वो जिसमें धोखा शामिल है, जैसे अपने एक्स को मैसेज करना और सबूत मिटा देना, या किसी नए आकर्षक दोस्त का नंबर गलत नाम से सेव करना. इस तरह की माइक्रोचीटिंग गलत है यह एक तरह का धोखा ही है, साथ ही यह व्यवहार रिश्ते के लिए सबसे ज्यादा नुकसान दायक होता है, क्योंकि इससे भरोसा टूटता है और गलत फहमियां बढ़ती हैं जबकि दूसरा तरीका सामान्य है और सही ढंग से होने पर रिश्ते में नई जान फूँक सकता है. 

यह भी पढ़ेंः प्यार है या सिर्फ टाइमपास? इन 5 सवालों से मिलेगी आपको रिश्तों की क्लियरिटी

  • इसके अलावा जेफ गुएन्थर दूसरे तरीके को फ्लिकर (flicker) कहते हैं इसमें कोई झूठ या चोरी-छिपे वाली बात नहीं होती, बल्कि यह एक सामान्य खिंचाव है जो किसी को भी हो सकता है. जैसे किसी की सुंदरता पर अट्रेक्ट होना या फिर अट्रैक्टिव समझना, साथ ही किसी के साथ हल्की फुल्की हँसी मज़ाक वाली बातें करना और सोशल मीडिया पर किसी की अच्छी फोटो को पसंद करना.  जेफ पहली तरह की माइक्रोचीटिंग को रिश्ते के लिए बुरा मानते हैं वही अगर पार्टनर इस ‘फ्लिकर’ को लेकर एक दूसरे से खुलकर बात करें और उन्हें इससे असुरक्षित महसूस न हो, तो यह रिश्ते के लिए अच्छा भी हो सकता है
  • यह तभी काम करता है जब पार्टनर एक-दूसरे के प्रति वफादार हों और उन्हें भरोसा हो कि सामने वाले को पता है कि “कब, कहाँ और कितनी हद तक” दूसरों की तरफ आकर्षित होना है. 

यह भी पढ़ेंः रिश्ते में दूरी या खत्म होता प्यार! इन 7 संकेतों से जानें, क्या मन ही मन दूर हो चुका पार्टनर?

कौन सा बेहतर है?

Jeff Guenther के मुताबिक, “फ्लिकर”  कम नुकसानदायक होती है, क्योंकि इसमें छुपाव नहीं होता, लेकिन वे यह भी साफ कहते हैं कि रिश्ते में ईमानदारी जरूरी है, वही रिश्तों में boundaries तय होना जरूरी है साथ ही दोनों पार्टनर की सहमति अहम है

माइक्रोचीटिंग भले ही छोटी बात लगे, पर यह रिश्ते पर बड़ा असर डाल सकती है इसीलिए किसी भी रिश्ते में भरोसा, सच्चाई और खुलकर बात करना सबसे ज्यादा जरूरी है साथ ही अगर पार्टनर एक दूसरे की फीलिंग्स की कद्र करें और आपस में ईमानदार रहें, तो उनका रिश्ता और भी मजबूत और खुशहाल बनता है.

यह भी पढ़ेंः मुहब्बत-निकाह और… अलगाव! जब छोटी-छोटी बातों ने उजाड़ दिए बसे-बसाए घर



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *