Hanuman: हनुमान जन्म का बड़ा रहस्य, कहीं चैत्र तो कहीं कार्तिक, आखिर कौन सी तिथि सही?


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Hanuman Janmotsav: रामभक्त भगवान हनुमान का जन्मोत्सव या हनुमान जयंती भारत के सबसे प्रमुख धार्मिक त्योहारों में एक है. इस वर्ष गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को धूमधाम और आस्था के साथ हनुमान जी की जयंती मनाई गई. हनुमान जयंती पर श्रद्धालुओं ने व्रत रखा, पूजा-पाठ किए, हनुमान मंदिरों में पूजा-अर्चना और हनुमान चालीसा का पाठ किया और भक्तों ने संकटमोचन हनुमान से सुख-समृद्धि की कामना की.

आमतौर पर जयंती या जन्मोत्सव जैसे पर्व साल में एक बार होते हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि, देश के अलग-अलग हिस्सों में हनुमान जयंती की तिथियां भी अलग-अलग मानी जाती हैं. हनुमान जयंती भी साल मे दो से तीन बार मनाई जाती है. कहीं इसे चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है तो कहीं कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर तो कहीं मार्गशीर्ष महीने में. इसलिए लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि, आखिर हनुमान जयंती की सही तिथि कौन-सी है? अगर आपके मन में भी ऐसा ही सवाल है तो ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास आपकी इस कंफ्यूजन को दूर करेंगे.

अलग-अलग तिथियों में क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती

हनुमान जयंती अलग-अलग तिथियों में मनाए जाने का सबसे अहम कारण हनुमान से जुड़ी पौराणिक कथाएं. एक कथा के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जी को दूसरा जीवन मिला था. जब बाल्यावस्था में अत्यंत भूख के कारण सूर्य को फल समझकर निगलने वाले थे, तभी इंद्र ने अपने वज्र से उनपर प्रहार कर दिया था और हनुमान मूर्छित हो गए थे. तब वायुदेव और सभी देवताओं ने हनुमान को दूसरा जीवन प्रदान किया और अपनी शक्तियां भी दीं. इसलिए इस दिन चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती मनाई जाती है.

वहीं कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भी हनुमान जयंती मनाई जाती है. धार्मिक व पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी तिथि पर माता अंजनी के गर्भ से हनुमान जी का जन्म हुआ था. इसलिए इस तिथि को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इसके अलावा एक मान्यता यह भी है कि, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर माता सीता और भगवान राम ने हनुमान को चिरंजीवी होने का वरदान दिया था. इसलिए भी कार्तिक में हनुमान जयंती मनाई जाती है.

उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती

उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा पर मनाई जाती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान शिव के अंशावतार और माता अंजनी के पुत्र हनुमान का जन्म हुआ था. इस दिन मंदिरों में सुंदरकांड का पाठ, हनुमान चालीसा का पाठ और विशेष पूजन किया जाता है. कई जगहों पर भंडारे का आयोजन होता है और शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं.

दक्षिण भारत में अलग-अलग तिथियों पर उत्सव

दक्षिण भारत के कई राज्यों में हनुमान जयंती की तिथि अलग मानी जाती है. कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इसे मार्गशीर्ष या पौष मास में मनाने की परंपरा है. तमिलनाडु में हनुमान जन्मोत्सव (हनुमथ जयंती) मार्गशीर्ष अमावस्या के आसपास मनाया जाता है. वहीं कुछ क्षेत्रों में कार्तिक महीने में हनुमान जयंती मनाने की परंपरा है.

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