
मंदिरों या पवित्र वस्तुओं की परिक्रमा करने की परंपरा को प्रदक्षिणा कहा जाता है और यह हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान है. यह श्रद्धा और भक्ति के प्रतीक के रूप में किसी मंदिर, देवता या पवित्र स्मारककी दक्षिणवर्त दिशा में परिक्रमा करना है. कभी सोचा है कि, आखिर ये प्रथा क्यों जारी हुई और इसका महत्व क्या है? प्रदक्षिणा को समझना यह जानना भी है कि, शरीर की गति को आध्यात्मिक अभ्यास और ईश्वर के निकट आने का माध्यम कैसे बनाया जाता है.

संस्कृत में प्रदक्षिणा का मतलब दाईं ओर होता है. इसका अर्थ है कि, किसी पवित्र चीज के चारों ओर घूमना, उस पवित्र चीज को अपने दाहिनी और रखकर. यह हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में किया जाता है, जो एक फायदेमंद दिशा है. साधक पारंपरिक रूप से मंत्र पढ़ते या प्रार्थना करते हुए किसी मंदिर, किसी देवता की मूर्ति या किसी पवित्र पेड़ या पत्थर की परिक्रमा करते हैं. यह केवल एक रस्मी नहीं है, बल्कि एक प्रतीकात्मक भी है.
Published at : 05 Apr 2026 09:24 AM (IST)