Delhi EWS Quota: दिल्ली के गरीब बच्चों के लिए बड़ी खबर, सरकार ने निकाला प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन का ड्रॉ


दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन कराने का सपना देख रहे गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी खबर है. दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्राइवेट स्कूलों में नर्सरी, केजी और पहली कक्षा में एडमिशन का कंप्यूटरीकृत ड्रॉ निकाल दिया है. यह ड्रॉ ईडब्ल्यूएस, डीजी और विशेष जरूरत वाले बच्चों यानी CWSN श्रेणी के लिए निकाला गया. बता दें कि ओल्ड सचिवालय में हुए इस कार्यक्रम में दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने ड्रॉ निकाला. इस दौरान कई पैरेंट्स ने खुद मंच पर आकर बटन दबाया.

सरकार की क्या है प्लानिंग?

शिक्षा मंत्री के मुताबिक, दिल्ली सरकार चाहती है कि हर गरीब और जरूरतमंद बच्चे को अच्छे निजी स्कूल में पढ़ने का मौका मिले. उन्होंने कहा कि इस बार दाखिले की प्रक्रिया पहले से ज्यादा साफ और आसान बनाई गई है. अब आवेदन की जांच आधार कार्ड आधारित तकनीक से हुई है. इससे एक ही बच्चे के नाम पर कई आवेदन करने या गलत जानकारी देने पर रोक लगी है. सरकार का कहना है कि इससे असली जरूरतमंद बच्चों को फायदा मिलेगा.

स्कूलों में बढ़ाई गईं सीटें

गौरतलब है कि इस साल प्राइवेट स्कूलों में सीटों की संख्या भी बढ़ी है. पिछले साल 2219 स्कूल इस योजना में थे, जबकि इस बार 2308 स्कूल शामिल किए गए हैं.  ईडब्ल्यूएस और डीजी श्रेणी में सीटें बढ़कर 48092 हो गई हैं. वहीं, CWSN श्रेणी में 7609 सीटें रखी गई हैं. कुल मिलाकर इस बार 55701 सीटें उपलब्ध हैं, जो पिछले साल से 5185 ज्यादा हैं. 

कितने ज्यादा मिले थे आवेदन?

जानकारी के मुताबिक, रेखा गुप्ता सरकार को इस बार 1 लाख 39 हजार से ज्यादा आवेदन मिले. इनमें से सबसे ज्यादा आवेदन ईडब्ल्यूएस और डीजी श्रेणी में आए. CWSN श्रेणी में भी पिछले साल के मुकाबले ज्यादा परिवारों ने आवेदन किया.

इन बातों का रखें ध्यान

शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि एक बार ड्रॉ निकलने और रिजल्ट फ्रीज होने के बाद उसमें कोई बदलाव नहीं होगा. जिन बच्चों का चयन हुआ है, उन्हें तुरंत स्कूल आवंटित कर दिए गए हैं. अगले तीन दिन में दस्तावेजों की जांच शुरू होगी. इस बार कई दस्तावेज मोबाइल पर ही जांचे जाएंगे, ताकि पैरेंट्स को स्कूलों और दफ्तरों के चक्कर बार-बार न लगाने पड़ें.

गरीबों के लिए रिजर्व होती हैं इतनी सीटें

बता दें कि दिल्ली में यह व्यवस्था कई साल से चल रही है. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में लगभग 25 प्रतिशत सीटें गरीब, वंचित और विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए रखी जाती हैं. इसी नियम के तहत हर साल ड्रॉ के जरिए बच्चों को स्कूल आवंटित किए जाते हैं. इस बार सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया पहले से ज्यादा पारदर्शी और आसान रही है.

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