How To Improve Libido After Pregnancy: मां बनना किसी भी महिला के जीवन का बेहद खास और इमोशनल अनुभव होता है. लेकिन इसके साथ ही शरीर और मन में कई बड़े बदलाव भी आते हैं, जिनका असर रिश्तों और खासकर फिजिकल इंटिमेसी पर पड़ सकता है. यही वजह है कि कई महिलाओं में बच्चे के जन्म के बाद फिजिकल इंटिमेसी यानी शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा कम हो जाती है. एक्सपर्ट इसे एक सामान्य और अस्थायी बदलाव मानते हैं.
क्या होते हैं कारण?
डिलीवरी के बाद सबसे बड़ा कारण होता है थकान. नवजात शिशु की देखभाल में दिन-रात का फर्क मिट जाता है. नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर लगातार थका हुआ महसूस करता है। ऐसे में फिजिकल रिलेशन की इच्छा कम होना स्वाभाविक है. इसके अलावा पोस्टनेटल डिप्रेशन भी एक बड़ी वजह है. कई महिलाएं बच्चे के जन्म के बाद मानसिक दबाव, चिंता और भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुजरती हैं. यह स्थिति न सिर्फ उनके मूड को प्रभावित करती है, बल्कि पार्टनर के साथ नजदीकी पर भी असर डालती है.
हॉर्मोनल बदलाव का भी अहम रोल
हॉर्मोनल बदलाव भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हॉर्मोन का स्तर अचानक कम हो जाता है. इससे शरीर की प्राकृतिक लुब्रिकेशन प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे इंटिमेसी के दौरान असहजता महसूस हो सकती है और इच्छा में कमी आ सकती है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
यूरोपीय जर्नल ऑफ मिडवाइफरी में पब्लिश एक रिसर्च में बताया गया कि ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं में यह समस्या और ज्यादा देखने को मिलती है. ब्रेस्टफीडिंग के दौरान भी एस्ट्रोजन का स्तर कम रहता है, जिससे फिजिकल इंटिमेसी पर असर पड़ता है. कुछ स्टडीज में यह भी सामने आया है कि जो महिलाएं एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं, उनमें लुब्रिकेशन की कमी और दर्द जैसी समस्याएं ज्यादा हो सकती हैं.
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शरीर में होते हैं बदलाव
इसके साथ ही शरीर में आए बदलाव भी महिलाओं के आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं. प्रेग्नेंसी के बाद वजन बढ़ना, स्ट्रेच मार्क्स या शरीर के आकार में बदलाव कई बार महिलाओं को असहज महसूस कराते हैं. इससे उनकी बॉडी इमेज पर असर पड़ता है और वे खुद को पहले जैसा आकर्षक नहीं मान पातीं, जिसका सीधा असर उनकी इंटिमेसी पर पड़ता है. हालांकि एक्सपर्ट साफ कहते हैं कि यह स्थिति स्थायी नहीं होती.
पार्टनर के साथ खुलकर बात करना
सही समय, बातचीत और देखभाल से इसे बेहतर किया जा सकता है. पार्टनर के साथ खुलकर बात करना, खुद के लिए समय निकालना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या काउंसलर की मदद लेना फायदेमंद हो सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि हर महिला का शरीर अलग होता है और डिलीवरी के बाद उसमें बदलाव आना पूरी तरह सामान्य है. ऐसे में खुद को समय देना और अपने शरीर को स्वीकार करना ही इस दौर से बाहर निकलने का सबसे बेहतर तरीका माना जाता है.
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