Asha Bhosle: सीने में इंफेक्शन से कब हो जाती है इंसान की मौत, आशा भोसले का इसी बीमारी से हुआ निधन?

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Asha Bhosle Death Reason: भारतीय संगीत की सबसे महान गायिकाओं में से एक आशा भोसले का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. उन्हें शनिवार को  ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जब उन्हें दिल और सांस से जुड़ी दिक्कतें हुईं. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं चल रही थी. हालत बिगड़ने पर उन्हें गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया, जहां शनिवार रात उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया था. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे सीने में इंफेक्शन से इंसान की मौत हो जाती है. 

सीने का इंफेक्शन कई बार मामूली सर्दी-खांसी जैसा लगता है, लेकिन कुछ मामलों में यही समस्या तेजी से गंभीर रूप ले सकती है. प्न्यूमोनिया एक ऐसी ही स्थिति है, जिसमें फेफड़ों में इंफेक्शन हो जाता है. यह बैक्टीरिया, वायरस या फंगस के कारण होता है और फेफड़ों के टिश्यू में सूजन के साथ उनमें पानी या पस भर सकता है. यही वजह है कि सांस लेना मुश्किल होने लगता है और ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है. 

लंग्स होते हैं प्रभावित

हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था clevelandclinic के अनुसार,  प्न्यूमोनिया एक या दोनों फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। जब दोनों फेफड़े इंफेक्टेड होते हैं, तो इसे डबल या बाइलेटरल प्न्यूमोनिया कहा जाता है, जो ज्यादा खतरनाक हो सकता है. खासकर बैक्टीरियल प्न्यूमोनिया वायरल की तुलना में ज्यादा गंभीर माना जाता है और कई बार अस्पताल में भर्ती की जरूरत पड़ सकती है.  रिपोर्ट में बताया गया है कि सीने का इंफेक्शन तब जानलेवा बनता है, जब यह तेजी से बढ़कर शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई को प्रभावित करने लगता है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो फेफड़ों में सूजन बढ़ती जाती है और सांस लेने में दिक्कत गंभीर रूप ले लेती है. ऐसी स्थिति में मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट तक की जरूरत पड़ सकती है.

अलग- अलग तरह के इंफेक्शन

प्न्यूमोनिया के अलग-अलग प्रकार भी होते हैं, जो इसकी गंभीरता तय करते हैं. कम्युनिटी-एक्वायर्ड प्न्यूमोनिया आमतौर पर बाहर से होने वाला इंफेक्शन है, जबकि हॉस्पिटल-एक्वायर्ड प्न्यूमोनिया ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि यह एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट बैक्टीरिया से होता है और इलाज मुश्किल हो सकता है। इसी तरह वेंटिलेटर पर रहने वाले मरीजों में होने वाला इंफेक्शन भी जानलेवा साबित हो सकता है.

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65 साल से ऊपर के लोगों को ज्यादा खतरा

सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को होता है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है. 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग, छोटे बच्चे, पहले से दिल या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोग, स्मोकिंग करने वाले या कीमोथेरेपी जैसी ट्रीटमेंट ले रहे मरीज इस जोखिम में ज्यादा आते हैं. ऐसे लोगों में इंफेक्शन तेजी से बढ़ सकता है और हालत जल्दी बिगड़ सकती है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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