Screen Time Effects: खुश रहने के लिए बस अपने रुटीन में करें यह छोटा सा बदलाव, बाद में थैंक यू बोलेंगे आप

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How Reducing Social Media Improves Mental Health: आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया स्क्रॉल करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है.  इंस्टाग्राम पर अपडेट देखना, टिकटॉक वीडियो देखना या व्हाट्सऐप पर मैसेज का जवाब देना, इन सब में लोग घंटों बिताते हैं, बिना यह समझे कि इसका उनकी मेंटल सेहत पर कितना असर पड़ रहा है.  कोरोना महामारी के दौरान सोशल मीडिया ने लोगों को जोड़े रखने में मदद की थी, लेकिन अब एक्सपर्ट मानते हैं कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है. इसी वजह से इस पर कई रिसर्च भी सामने आ रहे हैं. 

क्या निकला रिसर्च में?

जर्मनी के एक मेंटल हेल्थ रिसर्च  एवं उपचार केंद्र में किए गए स्टडी में, जिसकी अगुवाई डॉ. जूलिया ब्राइलोव्स्काया ने की, में एक आसान लेकिन असरदार उपाय सामने आया है कि सोशल मीडिया का समय कम करें और उसकी जगह फिजिकल एक्टिविटी को शामिल करें. रिसर्च के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति रोज़ सिर्फ 30 मिनट सोशल मीडिया कम इस्तेमाल करे और उस समय को एक्सरसाइज में लगाए, तो मानसिक सेहत में बड़ा सुधार देखा जा सकता है. यह असर कुछ दिनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि महीनों तक बना रह सकता है.

क्या रहा रिसर्च का रिजल्ट?

इस अध्ययन में 642 लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें अलग-अलग समूहों में बांटा गया. एक समूह ने रोज 30 मिनट सोशल मीडिया कम किया, दूसरे ने उतना ही समय फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाई, तीसरे ने दोनों बदलाव अपनाए, जबकि एक समूह ने अपनी रूटीन में कोई बदलाव नहीं किया. दो हफ्तों तक प्रतिभागियों के मूड, तनाव, खुशी और जीवन संतुष्टि को मापा गया. नतीजे साफ थे कि जिन लोगों ने सोशल मीडिया कम किया या एक्सरसाइज बढ़ाई, वे ज्यादा खुश, संतुष्ट और कम डिप्रेस्ड महसूस करने लगे. उनमें डिप्रेशन के लक्षण भी कम देखे गए, जबकि सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को मिला जिन्होंने दोनों आदतों को एक साथ अपनाया.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

रिसर्च एक्सपर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल कई बार लत जैसा व्यवहार पैदा कर देता है. लगातार नोटिफिकेशन, दूसरों से तुलना और निगेटिव कंटेंट देखने से चिंता और असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है. महामारी के दौरान यह सहारा बना, लेकिन समय के साथ यह मेंटल थकान का कारण भी बन गया। वहीं, फिजिकल एक्टिविटी  मानसिक सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित होती है. चलना, दौड़ना, योग या हल्की स्ट्रेचिंग भी शरीर में ऐसे हार्मोन रिलीज करती है, जो मूड बेहतर करते हैं, तनाव कम करते हैं और एनर्जी बढ़ाते हैं.

इस स्टडी की खास बात यह रही कि इसके फायदे लंबे समय तक बने रहे. छह महीने बाद भी प्रतिभागियों में सोशल मीडिया का उपयोग कम और शारीरिक गतिविधि ज्यादा देखी गई, खासकर उन लोगों में जिन्होंने दोनों बदलाव अपनाए थे.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.



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