Sports Engineer: वैभव सूर्यवंशी के बल्ले से बुमराह के जूते तक…सबकुछ डिजाइन करने वाले स्पोर्ट्स इंजीनियर कैसे बनते हैं? 

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Sports Engineer: आज के समय में खेल और तकनीक का मेल तेजी से बढ रहा है, जिसे स्पोर्ट्स इंजीनियरिंग कहा जाता है. हाल ही में क्रिकेट जगत में 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को लेकर काफी चर्चा हुई. वैभव सूर्यवंशी ने IPL 2026 में दुनिया के टॉप गेंदबाजों के खिलाफ पहली ही गेंद पर छक्के लगाए, जिसमें बुमराह, ट्रेंट बोल्ट और पैट कमिंस जैसे नाम शामिल हैं.

इस तरह की परफॉर्मेंस के पीछे सिर्फ टैलेंट नहीं बल्कि बेहतर बैट डिजाइन, बैलेंस और तकनीक भी अहम भूमिका निभाती है, जिसे स्पोर्ट्स इंजीनियर तैयार करते हैं. स्पोर्ट्स इंजीनियर ऐसे लोग होते हैं जो खेल और तकनीक को मिलाकर खिलाड़ियों के लिए अच्छे उपकरण बनाते हैं. उनका काम यह सुनिश्चित करना होता है कि खिलाड़ी को ऐसा इक्विपमेंट मिले जिससे उसकी परफॉर्मेंस बेहतर हो और चोट लगने का खतरा कम हो.

बुमराह और वैभव के पीछे स्पोर्ट्स इंजीनियर का रोल

आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ी अकेले मेहनत से ही नहीं, बल्कि तकनीक की मदद से भी आगे बढते हैं. उदाहरण के तौर पर, जसप्रीत बुमराह जैसे गेंदबाज के जूते इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि उन्हें रनअप के दौरान सही ग्रिप और बैलेंस मिले. वहीं वैभव सूर्यवंशी जैसे बल्लेबाज के बल्ले को इस तरह तैयार किया जाता है कि शॉट खेलते समय ज्यादा पावर और कंट्रोल मिल सके. इन सभी चीजों के पीछे स्पोर्ट्स इंजीनियर की मेहनत होती है. स्पोर्ट्स इंजीनियर इन उपकरणों को बनाने के लिए ये इंजीनियर खिलाड़ियों के खेल को ध्यान से समझते हैं. शरीर की बनावट और उनके खेलने के तरीके का गहराई से विश्लेषण करते हैं. वे लैब में टेस्टिंग, डेटा एनालिसिस और डिजाइन तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसे उपकरण तैयार करते हैं, जो खिलाड़ी की परफॉर्मेंस को बेहतर बना सकें.

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स्पोर्ट्स इंजीनियर बनने के लिए क्या-क्या करना पडता है

स्पोर्ट्स इंजीनियर बनने के लिए सिर्फ पढ़ाई करना ही काफी नहीं होता, बल्कि कई जरूरी स्किल्स और अनुभव भी हासिल करने पडते हैं. सबसे पहले आपके अंदर खेल और तकनीक दोनों में रुचि होना जरूरी है. अगर आपको खेल पसंद है और साथ ही यह समझना अच्छा लगता है कि बैट, बॉल, जूते या हेलमेट कैसे काम करते हैं, तो यह फील्ड आपके लिए सही हो सकती है. इसके अलावा आपको डिजाइन से जुडी चीजें सीखनी पडती हैं. जैसे CAD (कंप्यूटर एडेड डिजाइन) सॉफ्टवेयर की मदद से उपकरणों का डिजाइन बनाया जाता है. इससे इंजीनियर पहले कंप्यूटर पर ही बैट या जूते का मॉडल तैयार करते हैं और देखते हैं कि वह कैसे काम करेगा. साथ ही मशीन और मैटेरियल को समझना, और डेटा एनालिसिस करना आना चाहिए.

स्पोर्ट्स इंजीनियर बनने के लिए सबसे पहले छात्र को 12वीं साइंस स्ट्रीम (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) से पास होना जरूरी होता है. इसके बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग, स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी या बायोमैकेनिक्स जैसे विषयों में ग्रेजुएशन किया जा सकता है. कई यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स इंजीनियरिंग से जुडे स्पेशल कोर्स भी कराती हैं. वहीं कई लोग इस फील्ड में इंटर्नशिप करके अनुभव हासिल करते हैं, जहां वे स्पोर्ट्स इक्विपमेंट बनाने और टेस्ट करने का काम सीखते हैं. यही अनुभव आगे नौकरी पाने में बहुत मदद करता है.

करियर और भविष्य के अवसर

स्पोर्ट्स इंजीनियरिंग आज तेजी से उभरता हुआ करियर बन चुका है. खेल कंपनियां, इंटरनेशनल ब्रांड, रिसर्च लैब और प्रोफेशनल टीमें ऐसे इंजीनियरों को हायर करती हैं. IPL जैसे टूर्नामेंट में खिलाड़ियों की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए हाईटेक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है. वैभव सूर्यवंशी की हाल की सफलता और जसप्रीत बुमराह जैसे गेंदबाजों के खिलाफ उनका प्रदर्शन यह दिखाता है कि खेल में तकनीक की भूमिका कितनी अहम हो चुकी है. सही स्किल्स और अनुभव के साथ इस फील्ड में अच्छा करियर बनाया जा सकता है.

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