CUET Exam 2026: सीबीएसई कक्षा 12वीं के लाखों छात्रों के लिए साल 2026 का रिजल्ट जल्द ही जारी होने वाला है. रिजल्ट को लेकर छात्रों में उत्साह के साथ साथ थोड़ी चिंता भी बनी हुई है क्योंकि इसके बाद ही कॉलेज एडमिशन की असली दौड़ शुरू होती है. खासकर दिल्ली यूनिवर्सिटी, जेएनयू और देश के अन्य टॉप कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए छात्रों को अच्छे अंकों की जरूरत होती है. रिपोर्ट्स के अनुसार सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट मई के मध्य तक जारी हो सकता है. हालांकि, भारत के टॉप विश्वविद्यालयों में एडमिशन की प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों में काफी बदल गई है, और अब सिर्फ बोर्ड के अंक ही उच्च शिक्षा में दाखिले का फैसला नहीं करते हैं.
DU, JNU और टॉप कॉलेजों में एडमिशन का तरीका
दिल्ली यूनिवर्सिटी और जेएनयू जैसे बड़े संस्थानों में एडमिशन के लिए CUET जैसे प्रवेश परीक्षा प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं, जो पूरी तरह मेरिट और एंट्रेंस स्कोर पर आधारित होता है. जबकि सीबीएसई के अंक अब केवल पात्रता और शैक्षणिक स्तर को दिखाने के लिए एक संकेत के रूप में उपयोग होते हैं, न कि अंतिम चयन के लिए. इस बदलाव से छात्रों के बीच एक तरफ चीजें साफ हुई हैं, लेकिन दूसरी तरफ थोड़ा कंफ्यूजन भी बढ़ा है. पहले जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसे कॉलेजों में बहुत ज्यादा कट ऑफ की चिंता रहती थी, अब वह दबाव कुछ कम हो गया है. लेकिन अब एक ही एंट्रेंस परीक्षा में अच्छा करना ज्यादा जरूरी हो गया है, जिससे प्रतियोगिता और बढ़ गई है. इसलिए 2026 के छात्रों के लिए जरूरी है कि वे बोर्ड परीक्षा और एंट्रेंस परीक्षा दोनों की तैयारी बराबर करें, ताकि वे अच्छे कॉलेजों में एडमिशन पाने की दौड़ में बने रह सकें.
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DU में बोर्ड और CUET का रोल
2026 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के यूजी एडमिशन के लिए 12वीं के बोर्ड परीक्षा के अंक सीधे मेरिट बनाने में इस्तेमाल नहीं होंगे, लेकिन बोर्ड परीक्षा पास करना जरूरी होगा. एडमिशन पूरी तरह CUET (UG) 2026 के स्कोर के आधार पर होगा, जो Common Seat Allocation System (CSAS) के जरिए किया जाएगा. हालांकि अगर दो उम्मीदवारों के CUET स्कोर बराबर होते हैं, तो ऐसी स्थिति में 12वीं और अब 10वीं के अंक का इस्तेमाल टाई ब्रेक करने के लिए किया जाएगा. इसके अलावा कुछ खास कोर्स के लिए यूनिवर्सिटी यह भी कह सकती है कि बोर्ड परीक्षा में एक न्यूनतम प्रतिशत होना जरूरी है, जिसे पूरा करना अनिवार्य होगा.
JNU और अन्य कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में अधिकतर कोर्सों में एडमिशन CUET स्कोर के आधार पर होता है. यहां सीबीएसई के अंक मुख्य रूप से सिर्फ पात्रता यानी योग्यता जांचने के लिए उपयोग किए जाते हैं. हालांकि जो छात्र अच्छे अकादमिक स्तर के होते हैं, वे अक्सर एंट्रेंस परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करते हैं. इसलिए कई सफल उम्मीदवारों के सीबीएसई में लगभग 75 से 90 प्रतिशत अंक देखने को मिलते हैं, लेकिन यह कोई अनिवार्य शर्त नहीं होता है. JNU में एडमिशन के लिए CUET परीक्षा में उम्मीदवारों को Section IA (English) और Section III (General Test) चुनना जरूरी होता है.
अन्य विश्वविद्यालयों में एडमिशन का तरीका
इसी तरह जामिया मिल्लिया इस्लामिया, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और कई निजी विश्वविद्यालयों में भी यही तरीका अपनाया जाता है. सीबीएसई के अंक केवल योग्यता और शैक्षणिक स्तर को दिखाते हैं, लेकिन असली चयन CUET के प्रदर्शन पर निर्भर करता है. इसलिए अगर किसी छात्र के 12वीं में सामान्य अंक भी हैं, तो भी वह एंट्रेंस परीक्षा में अच्छा स्कोर करके अच्छे कॉलेज में एडमिशन ले सकता है.
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