Phuchka Vs Golgappa: कैसे बनता है बंगाल का फुचका, गोलगप्पों से कितना अलग?

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Difference Between Phuchka And Golgappa: 4 मई को पश्चिम बंगाल सहित देश के पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आने वाले हैं. ऐसे में यहां के स्ट्रीट फूड की भी खूब चर्चा देखने को मिल रही है. देश के अलग-अलग शहरों में एक ही स्ट्रीट फूड अलग-अलग नाम और स्वाद के साथ मिलता है. कहीं इसे पानीपुरी कहा जाता है, तो कहीं गोलगप्पा और कोलकाता पहुंचते ही यही फुचका बन जाता है. नाम बदलते हैं, लेकिन असली फर्क इसके स्वाद, पानी और भरावन में छिपा होता है. 

कितना अलग है पश्चिम बंगाल का पुचका 

अगर बात करें बंगाल के फुचका की, तो इसकी पहचान सबसे पहले उसके खट्टे और तीखे स्वाद से होती है. दिल्ली के गोलगप्पे जहां इमली और पुदीने के पानी के लिए जाने जाते हैं, वहीं फुचका का पानी ज्यादा खट्टा और तेज होता है. इसमें काला नमक और मसालों की मात्रा ज्यादा होती है, जो इसे एक अलग तीखा स्वाद देता है. यही वजह है कि इसका हर निवाला ज्यादा चटपटा और जोरदार लगता है. 

पुचका और गोलगप्पे में फर्क

फुचका और गोलगप्पे के बीच दूसरा बड़ा फर्क इसकी भरावन में दिखता है. गोलगप्पे में आमतौर पर उबले आलू और सफेद चने का इस्तेमाल होता है, जो स्वाद में हल्का और सीधा होता है. वहीं फुचका में आलू के साथ काले चने, मसाले, हरी मिर्च और इमली का गूदा मिलाया जाता है. यह मिश्रण ज्यादा मसालेदार और गहरा स्वाद देता है, जिससे हर बाइट में अलग ही मजा आता है.

दोनों की बनावट में अतर

आकार और बनावट भी दोनों को अलग बनाती है. फुचका आमतौर पर थोड़ा बड़ा और पतला होता है, जबकि गोलगप्पा छोटा और ज्यादा कुरकुरा होता है. यही वजह है कि फुचका खाते समय उसमें ज्यादा भरावन और पानी आता है, जिससे स्वाद और भी गहरा महसूस होता है.

कैसे तैयार होता है पुचका

अगर बनाने की बात करें, तो फुचका तैयार करने की प्रक्रिया भी काफी दिलचस्प होती है. सबसे पहले सूजी और आटे से छोटी-छोटी पूरियां बनाई जाती हैं, जिन्हें तलकर या बेक करके कुरकुरा किया जाता है. इसके बाद आलू और काले चनों को मसालों के साथ अच्छे से मिलाकर भरावन तैयार किया जाता है. इसमें भुना जीरा, काला नमक, चाट मसाला और इमली का स्वाद मिलाया जाता है.

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पानी का स्वाद

फुचका का असली स्वाद उसके पानी में छिपा होता है. इसके लिए इमली, पुदीना, हरी मिर्च और मसालों को मिलाकर एक खट्टा-तीखा पानी तैयार किया जाता है. इसे ठंडा करके रखा जाता है ताकि स्वाद और बेहतर हो सके. परोसने के समय पूरियों में हल्का सा छेद करके उसमें मसालेदार भरावन भरा जाता है और फिर उसे इस खास पानी में डुबोकर तुरंत खाया जाता है. यही ताजगी और तेज स्वाद इसे बाकी जगहों के गोलगप्पों से अलग बनाता है.

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