हर साल जब UPSC का रिजल्ट आता है, तो कुछ नाम खबरों में चमकते हैं. लोग कहते हैं “ये IAS बन गया”, “वो IPS बन गई”. सुनने में दोनों एक जैसे लगते हैं, लेकिन असल में ये दो अलग कहानियां हैं. एक कहानी दफ्तरों, बैठकों और फैसलों की है. दूसरी कहानी वर्दी, मैदान और कार्रवाई की है. दोनों की शुरुआत एक ही परीक्षा से होती है, लेकिन आगे चलकर उनकी दुनिया, जिम्मेदारियां और काम करने का तरीका पूरी तरह बदल जाता है.
UPSC की मेरिट लिस्ट में सबसे ऊपर आने वाले उम्मीदवारों को अक्सर IAS मिलता है. उसके बाद की ऊंची रैंक पर IPS. यहीं से दोनों की दिशा तय हो जाती है. IAS अधिकारी मसूरी लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी जाते हैं. जबकि IPS अधिकारी हैदराबाद सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी पहुंचते हैं.
फाइलों से फैसलों तक
IAS अधिकारी वह चेहरा है जो सरकार को जमीन पर उतारते हैं. योजनाएं कागज से निकलकर गांव-शहर तक कैसे पहुंचेंगी, यह वही तय करते हैं. जिले में यही अधिकारी DM बनते हैं. पूरे जिले की कमान इनके हाथ में होती है. कभी बाढ़, कभी चुनाव, कभी विकास योजना हर जगह IAS की भूमिका होती है. मंत्रालयों में बैठकर ये नीतियां बनाते हैं, फैसले लेते हैं और सिस्टम को आगे बढ़ाते हैं. IAS का दिन बैठकों, फाइलों, योजनाओं और समीक्षा में गुजरता है.
यह भी पढ़ें- कौन थे भारत के पहले डिप्टी प्राइम मिनिस्टर? जानें उस समय कितनी मिलती थी सैलरी
वर्दी में जिम्मेदारी
IPS अधिकारी पुलिस विभाग की कमान संभालते हैं. जिले में ये SP बनते हैं. अपराध रोकना, जांच करना, शांति बनाए रखना यह इनका रोज का काम है. दंगे हों, अपराध हो, सुरक्षा का खतरा हो IPS सबसे आगे खड़ा मिलता है. आगे चलकर यही अधिकारी DGP बनते हैं और पूरे राज्य की पुलिस व्यवस्था संभालते हैं. IPS का दिन गश्त, जांच, पुलिस बल और मौके पर कार्रवाई में जाता है.
सैलरी और सुविधाएं
दोनों का शुरुआती वेतन 7वें वेतन आयोग के अनुसार 56,100 रुपये से शुरू होती है. आगे पद बढ़ने के साथ वेतन और सुविधाएं भी बढ़ती हैं. IPS अधिकारी DGP तक पहुंचते हैं, IAS अधिकारी सचिव स्तर तक पहुंच जाते है. इन पदों पर सैलरी भी काफी शानदार होती है साथ ही सुविधाएं भी.
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI