World’s Crude Oil Reserve: अमेरिका और ईरान के बीच जंग छिड़ने के बाद कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट, कच्चे तेल की कीमतों में ग्लोबल ऑयल मार्केट्स में उछाल को लेकर कई खबरें लगातार सामने आ रही हैं.
इस बीच, दुनिया में कच्चे तेल के भंडार पर Goldman Sachs की एक नई रिपोर्ट भी आई है. 2026 की इस रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का कुल भंडार घटकर अब केवल 101 दिनों के बराबर रह गया है, जो बीते आठ सालों का सबसे निचले स्तर है.
तेल से घट रहा फ्यूल का भंडार
फरवरी 2026 के अंत में वैश्विक तेल भंडार 106 दिनों की मांग के बराबर था, जो अब घटकर 101 दिनों के बराबर रह गया है. गोल्डमैन का कहना है कि मई 2026 तक यह 98 दिनों की मांग के बराबर रह जाएगा. कच्चे तेल के अलावा, पेट्रोल-डीजल और जेट फ्यूल जैसे कमर्शियल फ्यूल का भंडार भी युद्ध से पहले के 50 दिनों से घटकर 45 दिनों की मांग के बराबर रह गया है.
अमेरिका-ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी से इस सप्लाई में बड़ी रुकावट आई, जिससे अब रिजर्व में कमी की नौबत आ गई है. सप्लाई में कमी के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमातें में अब तक 6 परसेंट से ज्यादा का उछाल आ चुका है.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत के पास मौजूदा समय में लगभग 60 दिनों की मांग पूरी करने के बराबर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार है. जबकि सरकार के मुताबिक, देश के पास 74 दिनों का फ्यूल स्टॉक मौजूद है. हालांकि, भारत अपनी सप्लाई चेन में विविधता लेकर आया है. मिडिल ईस्ट में शामिल देशों के अलावा भारत लगभग 40 दूसरे देशों से कच्चे तेल का आयात करता है ताकि होर्मुज में आई रुकावट का ज्यादा असर न पड़े.
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