Saudi vs India: सऊदी अरब और भारत के बीच तुलना सिर्फ सैलरी तक सीमित नहीं है, बल्कि आबादी, विकास स्तर और रोजगार के अवसरों के आधार पर भी काफी अंतर देखने को मिलता है. जहां भारत की आबादी करीब 140 करोड़ (1.4 बिलियन) है, वहीं सऊदी अरब की जनसंख्या लगभग 3.5 से 3.6 करोड़ के आसपास है. यानी भारत की आबादी सऊदी अरब से कई गुना ज्यादा है. वही अगर विकास के पैमाने यानी HDI (Human Development Index) की बात करें, तो सऊदी अरब का HDI करीब 0.87 के आसपास है, जो उच्च विकास (High Human Development) की श्रेणी में आता है, जबकि भारत का HDI लगभग 0.64 है, जो मध्यम विकास (Medium Human Development) में गिना जाता है. इस आधार पर सऊदी अरब को भारत से ज्यादा विकसित देश माना जाता है.
रोजगार के लिए सऊदी अरब क्यों है पसंदीदा?
रोजगार के नजरिए से देखे तो भी सऊदी अरब भारतीयों के लिए एक बड़ा केंद्र रहा है. अनुमान के मुताबिक, करीब 20 से 25 लाख से ज्यादा भारतीय सऊदी अरब में काम कर रहे हैं. हर साल हजारों लोग नौकरी की तलाश में वहां जाते हैं, जिनमें ड्राइवर, मजदूर, टेक्नीशियन और अन्य कामगार शामिल होते हैं. साथ ही बेहतर कमाई और सुविधाओं के कारण सऊदी अरब लंबे समय से भारतीय कामगारों की पहली पसंद बना हुआ है.
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सऊदी अरब में ड्राइवर की सैलरी और सुविधाएं
अब अगर ड्राइवर की सैलरी की बात करें, तो सऊदी अरब में एक सामान्य ड्राइवर को लगभग 1500 से 3000 सऊदी रियाल (SAR) प्रति महीना मिलता है, जो भारतीय रुपये में करीब 33,000 से 66,000 रुपये के बराबर होता है. अनुभव और काम के आधार पर यह सैलरी 4000 SAR यानी करीब 88,000 रुपये तक भी पहुंच सकती है. खास बात यह है कि वहां रहने की जगह, खाना और मेडिकल सुविधा भी देते हैं, जिससे खर्च कम होता है और बचत ज्यादा हो पाती है.
भारत में ड्राइवर की सैलरी का हाल
वहीं भारत में ड्राइवर की सैलरी कि बात करें तो वे काफी हद तक शहर और काम पर निर्भर करती है. छोटे शहरों में ड्राइवर को 10,000 से 15,000 रुपये तक मिलते हैं, जबकि बड़े शहरों में यह 15,000 से 25,000 रुपये के बीच होती है. वही कुछ कैब ड्राइवर या निजी ड्राइवर इससे ज्यादा कमा सकते हैं, लेकिन उन्हें ईंधन, गाड़ी की देखभाल और अन्य खर्च खुद उठाने पड़ते हैं.
भारत और सऊदी अरब के बीच तुलना
अगर सीधी तुलना करें, तो सऊदी अरब में ड्राइवर की सैलरी भारत के मुकाबले लगभग 2 से 3 गुना ज्यादा है. लेकिन यह अंतर सिर्फ सैलरी तक ही सीमित नहीं है. बल्कि सऊदी में बेसिक जरूरतों जैसे रहने और खाने की सुविधा मिलने से बचत भी ज्यादा होती है, जबकि भारत में कम सैलरी के बावजूद जीवन यापन का खर्च, खासकर छोटे शहरों में, कम होता है.
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