BCCI issues honey trap alert: इंडियन प्रीमियर लीग 2026 सीजन के बीच बीसीसीआई ने अनुशासन को लेकर अपना सबसे सख्त नियम लागू किया है. राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ियों और स्टाफ की ओर से प्रोटोकॉल के उल्लंघन की खबरों के बाद बोर्ड ने सभी 10 फ्रेंचाइजियों के लिए 8 पन्नों की एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी कर दिया है. सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट कर दिया है कि हाल की घटनाओं ने लीग की छवि पर सवाल खड़े किए हैं और अब किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
इस नई गाइडलाइन में सबसे अधिक जोर ‘हनी ट्रैप’ और सुरक्षा खतरों पर दिया गया है. बोर्ड की जांच में यह सामने आया है कि कुछ खिलाड़ी टीम मैनेजर को बिना बताए अपने होटल रूम में बाहरी लोगों को बुला रहे थे. अब नियमों को इतना कड़ा कर दिया गया है कि कोई भी बाहरी व्यक्ति, चाहे वह खिलाड़ी का सगा रिश्तेदार ही क्यों न हो, बिना मैनेजर की लिखित अनुमति के कमरे में प्रवेश नहीं कर सकेगा.
मुलाकातों के लिए भी अब लक्ष्मण रेखा खींच दी गई है
खिलाड़ियों को सख्त निर्देश हैं कि वे किसी भी गेस्ट से केवल होटल की लॉबी या सार्वजनिक स्थानों पर ही मिलें. होटल के कमरों को पूरी तरह से ‘प्राइवेट जोन’ घोषित कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा चूक की गुंजाइश न रहे.
ड्रेसिंग रूम में वेपिंग पर लगा बैन
हाल ही में रियान पराग ड्रेसिंग रूम में वेपिंग (ई-सिगरेट) करते पकड़े गए थे. इसे देखते हुए बीसीसीआई ने साफ कर दिया है कि टूर्नामेंट वेन्यू, होटल और ड्रेसिंग रूम में ई-सिगरेट या किसी भी प्रकार का नशा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. बोर्ड ने यह भी याद दिलाया है कि ई-सिगरेट का इस्तेमाल भारतीय कानून के तहत एक संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आ सकता है, इसलिए इसके उल्लंघन पर न केवल बीसीसीआई बल्कि कानूनी एजेंसियां भी कार्रवाई कर सकती हैं.
फ्रेंचाइजी मैनेजमेंट को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने हर सदस्य को इन नियमों के बारे में विस्तार से समझाएं. बोर्ड ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि प्रतिबंधित पदार्थों का सेवन पाया जाने पर खिलाड़ी या स्टाफ को कानूनी कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है. यह कदम खेल की गरिमा और युवाओं पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.
नियमों की यह सख्ती केवल खिलाड़ियों तक ही सीमित नहीं है. अब खिलाड़ियों और स्टाफ को होटल परिसर से बाहर कदम रखने से पहले सिक्योरिटी अधिकारियों (SLO/TIO) से औपचारिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा. इससे बोर्ड हर सदस्य की मूवमेंट पर पैनी नजर रख सकेगा और किसी भी अनहोनी या बाहरी संपर्क से खिलाड़ियों को बचा सकेगा.
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टीम मालिकों के लिए ‘नो एंट्री जोन’
एक और चौंकाने वाला बदलाव टीम मालिकों से जुड़ा है. अक्सर मैचों के दौरान मालिक जोश में आकर खिलाड़ियों को गले लगाते या मैदान पर बातचीत करते दिखते थे, लेकिन बीसीसीआई ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना है. अब मैच के दौरान टीम मालिक ड्रेसिंग रूम, डगआउट या प्लेइंग एरिया में खिलाड़ियों से न तो शारीरिक संपर्क कर सकेंगे और न ही सीधे बातचीत कर सकेंगे. उन्हें संवाद के लिए केवल अधिकृत चैनलों का ही सहारा लेना होगा.
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इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए बीसीसीआई ने टाइमलाइन भी तय कर दी है. सभी टीम मैनेजर्स को 48 घंटे के भीतर अपने खिलाड़ियों को ब्रीफिंग देनी होगी और उनसे लिखित में पावती (acknowledgment) लेनी होगी कि उन्होंने नियम पढ़ और समझ लिए हैं. बोर्ड ने साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही को एक गंभीर अनुशासनात्मक मामला माना जाएगा.
नियम तोड़ने वाले खिलाड़ियों या स्टाफ पर भारी जुर्माना, कारण बताओ नोटिस और मौजूदा या अगले सीजन के लिए निलंबन हो सकती है. गंभीर मामलों में बीसीसीआई पुलिस को केस रेफर करने जैसी कार्रवाई कर सकता है. खेल की मर्यादा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड अब समय-समय पर टीमों का निरीक्षण और ऑडिट भी करेगा.