Delhi Detects 12000 TB Cases In Six Weeks: दिल्ली में टीबी के खिलाफ चलाए जा रहे बड़े अभियान के दौरान महज छह हफ्तों में 12 हजार से ज्यादा मरीजों की पहचान हुई है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 24 मार्च से 4 मई के बीच चलाए गए ‘टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0’ के तहत राजधानी के स्लम इलाकों, भीड़भाड़ वाली बस्तियों और हाई रिस्क क्षेत्रों में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग की गई, जिससे हजारों ऐसे मरीज सामने आए जिनमें पहले टीबी की पहचान नहीं हो पाई थी. यह अभियान अभी भी जारी है.
12 हजार मरीज मिले
दिल्ली में राष्ट्रीय टीबी मुक्त कार्यक्रम के तहत चल रहे इस अभियान में कुल 12 हजार से ज्यादा मरीजों की पुष्टि हुई. इनमें 1,323 बच्चे शामिल हैं, जबकि 10,755 वयस्क मरीज पाए गए. आंकड़ों के अनुसार 6,360 पुरुष, 5,715 महिलाएं और तीन ट्रांसजेंडर व्यक्ति टीबी संक्रमित मिले हैं.
हेल्थ अधिकारियों का क्या है कहना?
राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि दिल्ली की 24 चेस्ट क्लीनिकों में हर महीने औसतन करीब 6 हजार टीबी मरीज सामने आते हैं, लेकिन 24 मार्च से शुरू हुए 100 दिवसीय अभियान के बाद मरीजों की पहचान में तेजी आई है. अधिकारी के मुताबिक बड़े पैमाने पर पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें लगाई गई हैं, जिसकी वजह से ज्यादा स्क्रीनिंग हो रही है और अधिक मरीजों की पहचान संभव हो पाई है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि अब तक सबसे बड़ी चुनौती उन मरीजों की पहचान करना था जिनमें कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते थे. उन्होंने बताया कि इस विशेष अभियान का मकसद ऐसे लोगों को शुरुआती चरण में पकड़ना है, जो इंफेक्टेड तो हैं लेकिन अभी बीमारी के लक्षण सामने नहीं आए हैं. अधिकारी ने कहा कि जिन मरीजों की पहचान बाद में होनी थी, वे अब पहले ही सामने आ गए हैं.
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इन इलाकों पर फोकस
अभियान के दौरान खास तौर पर स्लम इलाकों, रैन बसेरों, जे.जे. कॉलोनियों, नशा मुक्ति केंद्रों, वृद्धाश्रमों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों पर फोकस किया गया. 24 मार्च से 4 मई के बीच 984 आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए गए, हाई रिस्क वार्डों और इलाकों में 224 शिविर लगाए गए, जबकि जेलों, वृद्धाश्रमों और अन्य सामुदायिक स्थानों पर 79 विशेष शिविर आयोजित किए गए. जिसमें कुल 71,603 लोगों की स्क्रीनिंग की गई.
जारी रहेगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अब इस अभियान को नियमित सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा बना दिया गया है और 100 दिन का अभियान खत्म होने के बाद भी स्क्रीनिंग जारी रहेगी. अधिकारियों ने बताया कि हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई हैं. हालांकि टीबी की पुष्टि अब भी माइक्रोबायोलॉजिकल जांच से ही की जाती है, लेकिन पोर्टेबल एक्स-रे की मदद से संदिग्ध मरीजों को तेजी से चिन्हित किया जा रहा है. इसमें धूम्रपान करने वाले लोग, शराब पीने वाले, एचआईवी और डायबिटीज मरीज, जेलों और वृद्धाश्रमों में रहने वाले लोग, स्लम निवासी, भिखारी, निर्माण मजदूर, रिक्शा चालक और गिग वर्कर्स को प्राथमिकता के आधार पर स्क्रीनिंग में शामिल किया गया.
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