Bird Flu alert in Maharashtra : महाराष्ट्र में बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ा: इंसानों तक कैसे पहुंच सकता है संक्रमण? जानें शुरुआती लक्षण और बचाव

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Bird Flu alert in Maharashtra : महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में हाल ही में म बर्ड फ्लू (Avian Influenza) के मामलों की खबरों ने स्वास्थ्य अधिकारियों और आम लोगों में चिंता बढ़ा दी है. संक्रमित पक्षियों की पहचान होने के बाद राज्य में निगरानी और रोकथाम के उपाय बढ़ा दिए गए हैं. देश के अन्य राज्यों में भी पिछले कुछ महीनों में H5N1 वायरस के संक्रमण की पुष्टि होने के बाद हजारों प क्षियों को मार दिया गया. कई लोगों के लिए बर्ड फ्लू अभी भी एक दूर की बीमारी लगती है, जो सिर्फ मुर्गियों और पोल्ट्री फार्मों तक सीमित है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि असली चिंता तब है जब इंसान भी इससे संक्रमित पक्षियों या उनके आसपास के वातावरण के संपर्क में आते हैं. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बर्ड फ्लू के वायरस मुख्य रूप से पक्षियों में फैलते हैं, लेकिन कुछ प्रकार जैसे H5N1 इंसानों में भी जा सकते हैं. हालांकि इस समय एक इंसान से दूसरे इंसान में संक्रमण का कोई बड़ा प्रमाण नहीं मिला है.विशेषज्ञों का कहना है कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन चेतावनी को नजरअंदाज करना भी खतरनाक हो सकता है. तो आइए जानते हैं कि  बर्ड फ्लू का संक्रमण इंसानों तक कैसे पहुंच सकता है. इसके शुरुआती लक्षण और बचाव क्या है. 

बर्ड फ्लू का संक्रमण इंसानों तक कैसे पहुंच सकता है?

कई लोग सोचते हैं कि बर्ड फ्लू इंसानों में आसानी से फैल सकता है, लेकिन यह एक मिथक है. अब तक कोई प्रमाण नहीं मिला है कि H5N1 इंसानों के बीच लगातार फैल रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, बर्ड फ्लू या एवियन इन्फ्लूएंजा मुख्य रूप से मुर्गियों, बत्तख और अन्य पोल्ट्री में फैलने वाला वायरस है. H5N1 जैसे कुछ प्रकार इंसानों को संक्रमित कर सकते हैं. यह मुख्य रूप से संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने, संक्रमित सतहों को छूने या पक्षियों के मारे जाने के दौरान फैलता है. वायरस इंसान के शरीर में आंख, नाक या मुंह के रास्ते प्रवेश कर सकता है. पोल्ट्री फार्मों में मौजूद संक्रमित बूंदें या धूल के कण सांस के जरिए भी संक्रमण फैला सकते हैं.

क्यों विशेषज्ञ इस आउटब्रेक पर नजर बनाए हुए हैं?

बर्ड फ्लू नई बीमारी नहीं है, लेकिन चिंता इस वजह से बढ़ रही है कि H5N1 अब पक्षियों और कुछ जानवरों में तेजी से फैल रहा है. पिछले कुछ वर्षों में यह वायरस एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका में फैल चुका है. 2024 में अमेरिका में डेयरी गायों में भी बर्ड फ्लू पाया गया था और कुछ फार्म वर्कर्स संक्रमित हुए थे. वायरस लगातार बदलता रहता है. हर बार जब यह जानवरों में फैलता है, तो इसके जीन में बदलाव होने की संभावना बढ़ जाती है. इसका मतलब यह नहीं कि तुरंत महामारी आएगी, लेकिन यही वजह है कि सरकारें और स्वास्थ्य संगठन हर मामले को गंभीरता से ले रहे हैं. WHO के अनुसार वर्तमान में जनस्वास्थ्य का जोखिम कम है, लेकिन निगरानी और तेजी से पहचान बेहद जरूरी है.

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बर्ड फ्लू के लक्षण

बर्ड फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे दिखते हैं. जैसे बुखार,खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, थकान, सांस लेने में दिक्कत. विशेषज्ञों का कहना है कि लक्षण कोविड-19 या सामान्य फ्लू जैसे लग सकते हैं. इसलिए अगर आपने पोल्ट्री या मृत पक्षियों के संपर्क में आने के बाद फ्लू जैसे लक्षण महसूस किए तो उन्हें नजरअंदाज न करें. गंभीर मामलों में बर्ड फ्लू तेजी से बढ़ सकता है और निमोनिया, सांस संबंधी परेशानी और अस्पताल में भर्ती की जरूरत पैदा कर सकता है. बिना जांच किए एंटीबायोटिक दवा लेना खतरनाक हो सकता है. 

बर्ड फ्लू के बचाव

1. चिकन और अंडे अच्छी तरह से पकाएं. WHO के अनुसार सही तरीके से पकाई गई पोल्ट्री से H5N1 वायरस नहीं फैलता है. 

2. मास्क पहनें, खासकर भीड़-भाड़ वाली जगहों पर, हाथों को नियमित रूप से धोएं और साफ रखें. 

3. पोल्ट्री फार्म में काम करते समय सतर्क रहें. पक्षियों को संभालते समय सुरक्षा उपकरण (ग्लव्स, मास्क) का इस्तेमाल करें. 

4. बुखार, खांसी या सांस लेने में दिक्कत जैसी कोई भी परेशानी महसूस होने पर देर न करें.

5. बीमार या मृत पक्षियों को न छुएं. असामान्य पक्षी मौत की सूचना तुरंत स्थानीय अधिकारियों को दें. 

6. कच्ची पोल्ट्री छूने के बाद हाथ धोएं, सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि की अफवाहें फैलाने से बचें.  

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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