CII Business Summit 2026: ‘Gautam Adani: ‘फ्लैट’ नहीं ‘फ्रैक्चर्ड’ है दुनिया…’ व्यापार शिखर सम्मेलन में बोले गौतम अडानी, जानें क्या-क्या कहा

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Gautam Adani: अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने आज 11 मई को नई दिल्ली में आयोजित CII एनुअल बिजनेस समिट 2026 को सम्बोधित किया. इस साल के शिखर सम्मेलन का विषय ‘द फ्यूचर- ग्लोबल इकोनॉमी, इंडस्ट्री, सोसायटी’ है. इस दो दिवसीय कार्यक्रम में साल 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के रोडमैप पर चर्चा होगी. 

देश की ताकत के दो महत्वपूर्ण आधार

आज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गौतम अडानी ने कहा कि मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव ने यह साफ कर दिया है कि एनर्जी सिक्योरिटी और डिजिटल सिक्योरिटी दोनों अब किसी देश की ताकत के दो सबसे महत्वपूर्ण आधार है. उन्होंने कहा कि जो देश इन दिनों ऊर्जा और कम्प्यूटिंग या टेक्नोलॉजी को काबू में रखेगा, वही आने वाली सदी को आकार देगा. उन्होंने भारत के 500 गीगावाट बिजली क्षमता पार करने को इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने यह भी बताया कि अब दुनिया ‘फ्लैट’ नहीं, बल्कि ‘फ्रैक्चर्ड’ है यानी कि बंटी हुई है. ऐसे में सप्लाई चेन अब केवल दक्षता के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है. 

अडानी ने किया चीन और अमेरिका का जिक्र

अपनी इस बात को रखते हुए उन्होंने अमेरिका और चीन का उदाहरण दिया. जैसे कि अमेरिका ने पहले Energy Abundance बनाई और अब ‘कम्प्यूट’ पर कब्जा करना चाहता है. इसी तरह से चीन ने भी औद्योगिक क्षमता के साथ ‘एआई सम्प्रभुता’ को प्राथमिकता दी. उन्होंने कहा, ”अगर 1947 की आजादी राजनीतिक थी, तो 21वीं सदी की सच्ची आजादी का मतलब होगा उस ऊर्जा पर अपना अधिकार होना, जो हमारे घरों को रोशन करती है और उस इंटेलिजेंस पर अपना अधिकार होना, जो हमारे दिमाग का मार्गदर्शन करती है.”

भारत बनेगा ग्लोबल एआई हब

गौतम अडानी ने आगे यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में संकट जैसे कि होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी ने भारत के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को जरूरी कर दिया है. इस दौरान उन्होंने 2035 तक Sovereigm AI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 100 अरब डॉलर (लगभग 8.4 लाख करोड़) खर्च करने की भी बात कही. उनका लक्ष्य भारत को आगे आने वाले समय में ग्लोबल एआई हब बनाना है. यह निवेश विशेष रूप से ग्रीन-एनर्जी बेस्ड डेटा सेंटर्स के लिए है ताकि एआई के लिए जरूरी भारी बिजली की खपत को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके.  



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