NTA Exam System : भारत में हर साल लाखों छात्र इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य बड़े कोर्सेज में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षाएं देते हैं. देश में होने वाली ज्यादातर परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से कराया जाता है. लेकिन आज जिन परीक्षाओं को हम एक ही संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के जरिए होते देखते हैं, वे हमेशा से ऐसी नहीं थी. पहले अलग-अलग संस्थाएं और बोर्ड इन परीक्षाओं को आयोजित करते थे, लेकिन 2017 के बाद परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव आया और एक नया केंद्रीय सिस्टम तैयार हुआ. ऐसे में आइए जानते हैं कि जब NTA नहीं था तो बड़े एग्जाम कौन कराता था और 2017 के बाद एग्जाम पैटर्न कितना बदला.
NTA क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की स्थापना नवंबर 2017 में भारत सरकार ने की थी. इसका मुख्य उद्देश्य देश की प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं को एक ही, पारदर्शी और आधुनिक प्रणाली के तहत आयोजित करना था. पहले ये परीक्षाएं अलग-अलग संस्थाएं करवाती थीं, जिससे कई बार प्रक्रिया जटिल और असमान हो जाती थी. इसी समस्या को दूर करने के लिए NTA को एक स्वतंत्र संस्था के रूप में बनाया गया, जो डिजिटल और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली पर काम करती है.
जब NTA नहीं था तो बड़े एग्जाम कौन कराता था?
1. मेडिकल प्रवेश परीक्षा – पहले MBBS और BDS में एडमिशन के लिए AIPMT (All India Pre-Medical Test) होता था. इसे CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) आयोजित करता था, बाद में इसे बदलकर NEET कर दिया गया. इसके अलावा AIIMS दिल्ली अपनी अलग परीक्षा खुद कराता था. कई राज्यों की अपनी मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं भी थीं.
2. इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा – पहले इंजीनियरिंग के लिए AIEEE (All India Engineering Entrance Exam) होता था. इसे भी CBSE ही आयोजित करता था. वहीं बाद में इसे बदलकर JEE Main कर दिया गया और IIT के लिए अलग से JEE Advanced परीक्षा होती रही.
3. राज्य स्तर की परीक्षाएं – हर राज्य अपनी अलग परीक्षा करवाता था, जैसे MHT CET (महाराष्ट्र), BCECE (बिहार) और अन्य राज्य स्तरीय इंजीनियरिंग, मेडिकल परीक्षाएं.
NTA बनने के बाद क्या बदलाव हुआ?
NTA बनने के बाद परीक्षा प्रणाली में कई बड़े बदलाव हुए. अब कई बड़ी परीक्षाएं एक ही संस्था के तहत आने लगीं जैसे JEE Main, NEET UG, CUET, UGC NET. NTA ने लगभग सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित (CBT) बनाया. साथ ही आवेदन और रिजल्ट पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया. इसके अलावा देश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी परीक्षा केंद्र बनाए गए जिससे ज्यादा छात्र परीक्षा दे सकें. NTA ने कोशिश की कि पेपर लीक कम हों, मूल्यांकन तेज और निष्पक्ष हो. साथ ही एक जैसी परीक्षा प्रक्रिया पूरे देश में लागू हो.
यह भी पढ़ें – JNU MBA Admissions 2026: जेएनयू से एमबीए करने का सुनहरा मौका, इस तारीख तक करें आवेदन
2017 के बाद एग्जाम पैटर्न कितना बदला?
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) बनने के बाद भारत की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग परीक्षा JEE (Joint Entrance Examination) में कई अहम बदलाव देखने को मिले. खासकर परीक्षा के तरीके, पैटर्न और आयोजन प्रक्रिया में पहले की तुलना में काफी फर्क आया है. NTA आने से पहले इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम का संचालन मुख्य रूप से CBSE और उससे पहले AIEEE जैसे सिस्टम के तहत होता था. उस समय परीक्षा का पैटर्न अलग था. परीक्षा में कुल 90 प्रश्न पूछे जाते थे. हर विषय Physics, Chemistry और Mathematics से 30-30 प्रश्न होते थे. सभी प्रश्न अनिवार्य (compulsory) होते थे. हर गलत जवाब पर नेगेटिव मार्किंग लागू होती थी. परीक्षा ज्यादातर ऑफलाइन (पेन-पेपर मोड) में होती थी.
NTA आने के बाद बड़ा बदलाव
2017 में NTA बनने के बाद JEE परीक्षा पूरी तरह बदल गई. इसे ज्यादा डिजिटल और व्यवस्थित बनाया गया. अब JEE परीक्षा पूरी तरह ऑनलाइन कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट हो गई है. छात्रों को कंप्यूटर सेंटर पर परीक्षा देनी होती है. परीक्षा अभी भी तीन विषयों (Physics, Chemistry, Maths) पर आधारित है. हर विषय में Section A और Section B शामिल होता है. अब परीक्षा एक ही दिन में नहीं होती, इसे कई शिफ्टों में आयोजित किया जाता है. इसके अलावा एडमिट कार्ड, आवेदन और रिजल्ट पूरी तरह ऑनलाइन हो गए.
यह भी पढ़ें – IIT and NIT Fees Structure: आईआईटी और एनआईटी की फीस में कितना होता है अंतर, जानिए किसमें मिलेगा अच्छा प्लेसमेंट?
Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI