Parenting Tips: बचपन सिर्फ उम्र का एक पड़ाव नहीं, बल्कि जिंदगी की नींव होता है. इस दौर में बच्चे जो देखते और महसूस करते हैं, वही उनके व्यवहार और सोच का हिस्सा बन जाता है. हर माता-पिता की यही चाहत होती है कि उनके बच्चे का भविष्य काफी अच्छा और सफलताओं से भरा हुआ हो, इस ख्वाइश को पूरा करने के लिए पैरेंट्स हर वह चीज करते हैं, जो उन्हें लगता है कि उनके बच्चे के लिए जरूरी है. लेकिन, कई बार माता-पिता की छोटी-छोटी आदतें और अनजाने में की गई कुछ गलतियां बच्चों के मन पर गहरा असर डाल देती है, जिसका असर उनके भविष्य तक दिखाई देता है. पैरेंटस को समझने की जरूरत है कि बच्चों का बचपन सिर्फ पढ़ाई लिखाई और खेल कूद तक ही सीमित नहीं रहती है, बल्कि उनके अंदर खुशी, आजादी और इमोशनल सिक्योरिटी का भी एहसास होना चाहिए. ऐसे में जरूरी है कि समय रहते इन आदतों को पहचाना जाए और उन्हें सुधारा जाए.
बच्चों पर ज्यादा दबाव डालना
सबसे पहली आदत है बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालना. ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों को ऑलराउंडर बनाने के लिए उन पर हर चीज करने का दबाव डालने लगते हैं. हालांकि पढ़ाई, खेल या हर क्षेत्र में बेहतर करने की उम्मीद रखना गलत नहीं है, लेकिन हर समय परफेक्ट बनने का दबाव बच्चों के मन पर बोझ बन जाता है. इससे उनका आत्मविश्वास कमजोर होता है और वे डर या तनाव में रहने लगते हैं.
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उनके सामने गुस्सा करना
वही दूसरी गलत आदत है बच्चों के सामने गुस्सा करना या चिल्लाना. कई बार पैरेंटस आपसी झगड़े में इतने व्यस्त हो जानते हैं कि वे भूल जाते हैं कि वे किसके सामने लड़ रहे हैं. ऐसा व्यवहार बच्चों के मानसिक विकास को प्रभावित करता है और वे या तो डरपोक बन जाते हैं या फिर आक्रामक स्वभाव अपना लेते हैं.
बच्चों की तुलना करना
तीसरी बड़ी गलती है अपने बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से करना. जब आप दूसरे बच्चों को उससे बेहतर दिखाते हैं तो उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती है. साथ ही बच्चों के सामने गलत व्यवहार या झूठ नहीं बोलना चाहिए. बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने घर में देखते हैं. अगर माता-पिता ही गलत शब्दों का इस्तेमाल करें या झूठ बोलें, तो बच्चे भी उसे सही मान लेते हैं.
हर चीज पर कंट्रोल करना
चौथी आदत है हर चीज पर कंट्रोल करने की आदत कुछ माता-पिता की यह आदत होती है कि वे अपने बच्चे की हर छोटी से छोटी बात पर दखल देने लग जाते हैं. बच्चे को क्या पहनना है, किससे दोस्ती करनी है या फिर उसे किसके साथ खेलना है, हर बात पर पैरेंट्स दखल देने लग जाते हैं. इस हरकत की वजह से बच्चा कभी कॉंफिडेंट नहीं बन पाता है.
ऐसे में आपको अपने बच्चे को कुछ छोटे फैसले लेने की छूट दें ताकि उसके अंदर कॉन्फिडेंस और जिम्मेदारी की भावना डेवलप हो सके.
दिनचर्या और मोबाइल की आदत पर ध्यान न देना
पांचवीं और अहम आदत है बच्चों की दिनचर्या और संगत पर ध्यान न देना. अगर बच्चों का रूटीन तय नहीं होता और वे गलत संगत में समय बिताते हैं, तो उनकी आदतें बिगड़ने लगती हैं. वहीं आज के समय में बच्चे खेलने-कूदने की जगह मोबाइल और इंटरनेट पर ज्यादा समय बिताते हैं. वही अगर आप इस चीज पर कंट्रोल नहीं रखते हैं तो बच्चे को अकेलेपन की आदत लग जाती है और वह स्मार्टफोन के प्रति एडिक्टेड हो सकते हैं. साथ ही अनुशासन की कमी उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती है. इसलिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चों के समय, दोस्तों और दिनचर्या पर नजर रखें और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन दें.
सही परवरिश के लिए खुद में बदलाव जरूरी
इन पांच आदतों से साफ है कि बच्चों की परवरिश सिर्फ उन्हें सिखाने से नहीं, बल्कि खुद को सुधारने से भी जुड़ी होती है. माता-पिता अगर अपने व्यवहार में बदलाव लाते हैं, तो बच्चे खुद-ब-खुद अच्छी आदतें सीख जाते हैं. सही समय पर किया गया सुधार बच्चों के भविष्य को बेहतर और मजबूत बना सकता है.
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