शेयर बाजार की उठापटक के बीच SIP का जलवा, अप्रैल में आया 2.39 लाख करोड़ का निवेश, टूटा रिकॉर्ड!

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Mutual Funds Investment: बाजार में भारी उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में घरेलू निवेशकों ने म्यूचुअल फंड्स में दिल खोलकर पैसा लगाया, जो 3 लाख करोड़ से भी ज्यादा है. इसे निवेश का एक ‘ऐतिहासिक मोड़’ माना जा रहा है.

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी ताजा मासिक आंकड़ों के अनुसार, भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने अप्रैल 2026 में कुल 3.22 लाख करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया, जबकि कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड 81.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इससे पता चलता है कि बाजार में थोड़े समय के उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक म्यूचुअल फंड को लंबे समय में दौलत बनाने के एक विकल्प के तौर पर देखते आ रहे हैं.

गिरावट को इग्नोर कर दांव लगा रहे निवेशक 

अप्रैल में ग्रोथ और इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड स्कीम में 38440.20 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो हुआ. हालांकि यह मार्च के मुकाबले करीब 5 परसेंट कम जरूर है, लेकिन फिर भी इक्विटी फंड में निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत बनी रही. महीने के आखिर तक इक्विटी स्कीम का कुल AUM 35.74 लाख करोड़ रुपये रहा.

इक्विटी कैटेगरी में, फ्लेक्सी-कैप फंड में सबसे ज्यादा 10147.85 करोड़ रुपये का इनफ्लो हुआ. यह कैटेगरी फंड मैनेजरों को लार्ज-, मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों में निवेश करने की छूट देती है, जिससे अनिश्चित बाजार स्थितियों में डाइवर्सिफिकेशन चाहने वाले निवेशकों के लिए यह आकर्षक बन जाती है.

स्मॉल-कैप फंड में निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी बनी रही और इसमें 6885.90 करोड़ रुपये का इनफ्लो हुआ, जबकि मिड-कैप फंड में 6551.40 करोड़ रुपये आए. लार्ज और मिड-कैप फंड में 4490.49 करोड़ रुपये आए, जबकि मल्टी-कैप फंड में 3806.01 करोड़ रुपये आए.

निवेश का क्या है लॉजिक?

  • सिस्टेमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) भारतीयों के लिए निवेश का एक अनुशासित तरीका बन गया है. मार्च 2026 में मासिक SIP इनफ्लो 32087 करोड़ रुपये रहा, जो लॉन्ग टर्म में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है. 
  • फंड मैनेजर और रिटेल निवेशक बाजार की गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देख रहे हैं. स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स में भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद में जोखिम लेना जारी रख रहे हैं. 
  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय निवेशक देश के इकोनॉमिक ग्रोथ और घरेलू बाजार की मजबूती पर भरोसा कर रहे हैं. 
  • निवेशक अब फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जैसे पारंपरिक विकल्पों के बजाय बेहतर ‘इंफ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न’ के लिए म्यूचुअल फंड्स की ओर रुख कर रहे हैं. 

(यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

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