- ईरान-अमेरिका तनाव से होर्मुज जलमार्ग बंद, तेल भंडार में भारी गिरावट.
- वैश्विक तेल भंडार 8 साल के निम्नतम स्तर पर, आपूर्ति में कमी.
- भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया ऊर्जा आयात पर गंभीर खतरे में.
- विशेषज्ञों ने चेताया, तेल की कीमतों में भारी वृद्धि संभव.
Hormuz Strait: ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले और इसके जवाब स्वरूप तेहरान की होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी ने पूरी दुनिया के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं. आलम यह है कि वैश्विक तेल भंडार 8 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है.
Goldman Sachs की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी में जहां दुनिया के पास 105 दिनों का तेल का स्टॉक था, वह अब घटकर 101 दिन रह गया है. मई के अंत तक इसके 98 दिन तक गिरने का अनुमान है.
तेजी से घटता जा रहा ऑयल रिजर्व
फरवरी के अंत से यानी कि जब से ईरान में जंग की शुरुआत हुई है, तब से लेकर अब तक दुनिया भर के भंडारों से 100 करोड़ (1 बिलियन) से अधिक तेल का उपयोग किया जा चुका है. फिलहाल, ग्लोबल लेवल पर हर दिन 10-13 मिलियन बैरल तेल की कमी हो रही है. जहां तक रही भारत की बात, तो देश के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) में मौजूदा समय में केवल 3.37 मिलियन टन कच्चा तेल ही बचा है.
इन्वेन्ट्री में तेज गिरावट ने सरकार और एनर्जी मार्केट दोनों को चिंता में डाल दिया है. होर्मुज के लगभग दो महीने बंद रहने से अब तक एक अरब बैरल से ज्यादा की सप्लाई को नुकसान पहुंचा है. अब अगर यह और कुछ दिनों तक बंद रहा, तो हालात बद से बदतर हो सकते हैं. बता दें कि होर्मुज दुनिया का एक बड़ा महत्वपूर्ण ‘चेक पॉइंट’ है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 परसेंट और LNG का 20 परसेंट हिस्सा गुजरता है.
एक्सपर्ट्स ने दे डाली चेतावनी
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स और IEA और IMF जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने गंभीर चेतावनी दी है. इनका कहना है कि अगर होर्मुज सितंबर तक बंद रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 167 डॉलर से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.
ऊर्जा की कमी और बढ़ती कीमतों से दुनिया की GDP को 3.5 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो सकता है. इससे आने वाले 6-7 महीनों में खाद्य संकट भी पैदा हो सकता है क्योंकि उर्वरक (Fertilizer) बनाने में गैस का इस्तेमाल होता है. इसके अलावा, जहाजों के इंश्योरेंस और माल ढुलाई के दाम भी कई गुना तेजी से बढ़ सकते हैं.
जेपी मॉर्गन ने भी चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज आगे भी बंद रहता है, तो अगले महीने की शुरुआत में OECD इन्वेंट्री ‘ऑपरेशनल स्ट्रेस लेवल’ तक पहुंच सकती है और सितंबर तक इसके ‘ऑपरेशनल मिनिमम’ लेवल तक गिरने का अनुमान है.
किन देशों को सबसे ज्यादा खतरा?
- भारत अपनी जरूरत का 88 परसेंट तेल और 80 परसेंट LPG आयात करता है. सप्लाई रुकने से भारत में ईंधन की भारी कमी और महंगाई बढ़ने का खतरा है.
- चीन, जापान और दक्षिण कोरिया भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से खाड़ी देशों पर निर्भर है. जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की एनर्जी सिक्योरिटी होर्मुज के इस रास्ते पर सीधे तौर पर निर्भर है.
- बांग्लादेश और पाकिस्तान भी खतरे से खाली नहीं है. यहां पेट्रोल पंपों पर पहले से ही लंबी कतारें लगी हुई हैं. ईंधन की भारी कमी के बीच इन देशों में बिजली उत्पादन में मुश्किलें आ रही हैं. ऐसे में औद्योगिक उत्पादन ठप पड़ने की भी आशंका है.
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