- ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री रहते हुए एक भी रुपया वेतन नहीं लिया.
- उनकी आय का स्रोत पुस्तक लेखन, पेंटिंग और गीत लेखन है.
- सांसद के तौर पर लंबी सेवा के बाद उन्हें हर माह पेंशन मिलेगी.
- पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें जीवन भर अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी.
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के चौंकाने वाले परिणामों के बाद प्रशासनिक फेरबदल की गतिविधियां तेज हो गई. राज्यपाल ने बीते 7 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग कर दी है और इसी के साथ नई सरकार की गठन का रास्ता भी साफ हो गयाम्. राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम पर कल यानी कि शनिवार, 9 मई को मुहर लग सकती है, जिसका इंतजार सिर्फ पश्चिम बंगाल को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को है.
बंगाल की सत्ता पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में तृणमूल कांग्रेस का एक दशक से भी ज्यादा लंबे समय तक कब्जा रहा है. इस दौरान पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी कई वजहों से सुर्खियों में रहीं. उनके बारे में एक और बात हमेशा चर्चा में रही कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने एक भी रुपए की सैलरी नहीं ली.
ऐसा बताया जाता रहा है कि उन्होंने बीते 15 सालों में सत्ता में रहते हुए एक भी रुपए सैलरी नहीं ली और न ही सांसद और विधायक के रूप में पेंशन का लाभ उठाया. ऐसे में जाहिर तौर पर सवाल उठता है कि इतने बड़े पद पर रहते हुए बिना सैलरी या पेंशन के उनका गुजारा कैसे होता होगा?
कैसे होता है दीदी का गुजारा?
एक इंटरव्यू में ममता बनर्जी ने इस बात का खुलासा किया था कि उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में न कभी अपनी सैलरी ली और न सांसद के रूप में पेंशन को हाथ लगाया. उनकी कमाई का जरिया किताब लेखन, पेंटिंग, गीत लेखन है. रिपोर्टों के मुताबिक, राजनेता होने के साथ ममता बनर्जी एक लोकप्रिय लेखिका भी रही हैं.उन्होंने 100 से ज्यादा किताबें लिखी हैं. उन्हें अपनी लिखी गई किताबों से रॉयल्टी मिलती है, जो उनकी कमाई का एक बड़ा जरिया है. इससे उन्हें सालाना लगभग 10-11 लाख रुपये की कमाई होती है.
वह पेटिंग भी करती हैं. इससे हुई कमाई का हिस्सा वह दान कर देती हैं. हालांकि, कुछ रकम अपनी जरूरतों के लिए भी रखती हैं. वह गानों के लिए लिरिक्स भी लिखती हैं. जिस प्रोडक्शन हाउस के लिए वह गाने के बोल लिखती हैं, वह उन्हें सालाना 3 लाख रुपये तक देता है. यह भी उनकी कमाई का एक बड़ा जरिया रहा है. एक बार दीदी ने कहा था कि वह अकेली हैं इसलिए उन्हें गुजर-बसर के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत नहीं पड़ती. जितनी कमाई होती है उससे उनका आराम से काम चल जाता है.
अब कितनी मिलेगी पेंशन?
मुख्यमंत्री के पद से हटने के बाद अगर वह पेंशन लेने का विकल्प चुनती हैं, तो वह एक साथ कई पेंशनों और सुविधाओं की हकदार होंगी. ममता बनर्जी सात बार सांसद (MP) रह चुकी हैं इसलिए उनकी संभावित पेंशन का सबसे बड़ा हिस्सा इसी से आएगा. मौजूदा नियमों के मुताबिक, कम से कम पांच साल तक पद पर रहने वाले पूर्व MP को हर महीने 31,000 रुपये की बेसिक पेंशन मिलती है. सेवा के हर अतिरिक्त साल के लिए इसमें 2,500 रुपये और जुड़ जाते हैं. उनके लगभग 25–30 साल के लंबे संसदीय करियर को देखते हुए उनकी MP पेंशन ही हर महीने लगभग 80,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक हो सकती है.
MP के तौर पर अपने कार्यकाल के अलावा बनर्जी MLA और मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं. पश्चिम बंगाल के नियमों के तहत, पूर्व MLAs को उनकी सैलरी स्ट्रक्चर के आधार पर पेंशन मिलती है, जो अभी लगभग 1.21 लाख रुपये प्रति माह है. हालांकि पेंशन कैलकुलेशन का तरीका अलग-अलग हो सकता है. एक पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर उन्हें जीवन भर मिलने वाले लाभों का भी अधिकार है, जिनमें मेडिकल सुविधाएँ, Z+ सुरक्षा, स्टाफ और सरकारी आवास शामिल हैं.
एक से ज्यादा पेंशन के नियम
आमतौर पर, जो लोग MP और MLA दोनों पदों पर काम कर चुके हैं, वे किसी एक पेंशन को चुन सकते हैं- आमतौर पर वह पेंशन जो ज्यादा हो. बनर्जी का MP के तौर पर लंबा कार्यकाल रहा है, इसलिए संभवतः वही पेंशन सबसे ज्यादा होगी. इस पेंशन को स्वीकार करने का फैसला अगर उन्होंने कर लिया, तो उन्हें हर महीने 1 लाख रुपये से ज्यादा की रकम मिलेगी. साथ ही एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप मिलने वाली सुविधाएं भी जीवन भर मिलती रहेंगी.
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