- नीट परीक्षा 2026 पेपर लीक होने के कारण रद्द हुई.
- यह परीक्षा पहली बार 5 मई 2013 को आयोजित हुई थी.
- एक समान परीक्षा का उद्देश्य देश भर में दाखिला सुलभ बनाना था.
- नीट के जरिए MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्स में प्रवेश मिलता है.
नीट परीक्षा 2026 को रद्द कर दिया गया है. यह एग्जाम 3 मई को हुआ था. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से बेहद जल्द ही इस एग्जाम की नई डेट जारी की जाएगी. फिलहाल पेपर को पेपर लीक की खबरों के चलते रद्द करना पड़ा है. ऐसे में आइए जानते हैं देश में नीट परीक्षा पहली बार कब हुई थी? आइए डिटेल्स जानते हैं…
आज लाखों छात्र जब डॉक्टर बनने का सपना लेकर NEET की तैयारी करते हैं, तो शायद ही किसी को याद हो कि यह परीक्षा शुरू कब हुई थी. एक समय ऐसा भी था जब मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए अलग-अलग राज्यों और संस्थानों की अलग परीक्षाएं होती थीं. कहीं फॉर्म अलग, कहीं नियम अलग और कहीं फीस अलग. इसी उलझन और गड़बड़ी को खत्म करने के लिए एक बड़ी पहल की गई.
भारत में NEET यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट पहली बार 5 मई 2013 को आयोजित की गई थी. यह परीक्षा मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) और डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) की मंजूरी से शुरू की गई. इसका मकसद साफ था देश भर के सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्स में दाखिला एक ही परीक्षा के आधार पर दिया जाए.
क्यों पड़ी जरूरत?
पहले मेडिकल में दाखिले के लिए ‘एआईपीएमटी’ नाम की परीक्षा होती थी. इसके अलावा कई राज्य और निजी कॉलेज अपनी अलग परीक्षाएं भी कराते थे. इससे छात्रों पर कई परीक्षाओं का दबाव पड़ता था. ऊपर से निजी कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटा और भारी फीस को लेकर कई सवाल उठते थे. मेधावी छात्र पीछे रह जाते थे और जिनके पास पैसे थे, उन्हें ज्यादा मौका मिल जाता था.
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए एक समान परीक्षा लाने का फैसला हुआ. सुप्रीम कोर्ट की सहमति और केंद्र सरकार की पहल के बाद NEET लागू की गई. हालांकि शुरुआत में कुछ राज्यों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन बाद में यह परीक्षा पूरे देश में लागू हो गई.
शुरुआत में कौन कराता था परीक्षा?
जब 2013 में पहली बार NEET हुई, तब इसका आयोजन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) करता था. बाद में साल 2019 से इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को दे दी गई. आज भी NTA ही इस परीक्षा का आयोजन करती है.
किन कोर्स में मिलता है दाखिला?
NEET के जरिए MBBS और BDS के अलावा AYUSH, वेटनरी (BVSc) जैसे कोर्स में भी प्रवेश मिलता है. इतना ही नहीं, AIIMS और JIPMER जैसे बड़े संस्थानों में भी अब दाखिला NEET के आधार पर ही होता है. विदेश में MBBS करने के इच्छुक भारतीय छात्रों के लिए भी NEET पास करना जरूरी कर दिया गया है.
कौन दे सकता है परीक्षा?
इस परीक्षा को भारत के छात्र तो दे ही सकते हैं, साथ ही NRI, OCI, PIO और विदेशी नागरिक भी आवेदन कर सकते हैं. कम से कम आयु 17 साल तय की गई है. अधिकतम उम्र 25 साल है, उधर, आरक्षित वर्ग को 5 साल की छूट मिलती है.
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कितनी सीटें और कितनी होड़?
देश में सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में हजारों सीटें हैं, लेकिन उम्मीदवारों की संख्या लाखों में होती है. यही वजह है कि NEET को देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में गिना जाता है. हर साल भारी संख्या में छात्र इसमें बैठते हैं और सीटों के लिए कड़ी टक्कर होती है.
परीक्षा पैटर्न कैसा है?
NEET में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बॉटनी और जूलॉजी से सवाल पूछे जाते हैं. कुल 200 प्रश्न होते हैं, जिनमें से 180 सवाल हल करने होते हैं. हर सही जवाब पर 4 अंक मिलते हैं और गलत जवाब पर 1 अंक काटा जाता है. परीक्षा की अवधि 3 घंटे 20 मिनट की होती है. सवाल 12 से ज्यादा भाषाओं में उपलब्ध कराए जाते हैं, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी और कई क्षेत्रीय भाषाएं शामिल हैं. अगर छात्र हिंदी या किसी क्षेत्रीय भाषा का विकल्प चुनता है, तो उसे अंग्रेजी में भी प्रश्न पत्र मिलता है. अगर किसी भाषा में छपाई की गलती हो जाए, तो अंग्रेजी के प्रश्न को सही माना जाता है.
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