Gold Reserve News: भारत या पाकिस्तान, गोल्ड रिजर्व के मामले में कौनसा देश है आगे? चौंका देंगे आंकड़े

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  • पाकिस्तान में 90% गोल्ड ट्रेड अनौपचारिक चैनलों से होता है।

India Vs Pakistan Gold Comparison: सोना हर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. आज के टाइम में जब दुनिया में महंगाई और युद्ध का डर बढ़ रहा है तो कई देश अपने गोल्ड रिजर्व को तेजी से बढ़ा रहे हैं. दुनियाभर के केंद्रीय बैंक जैसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI और फेडरल रिजर्व अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोना रखते हैं.

अगर भारत और पाकिस्तान की तुलना करें तो सोने के मामले में भारत काफी आगे है. सरकारी भंडार से लेकर निजी खपत तक, हर मामले में भारत पाकिस्तान से कई गुना आगे नजर आता है.

गोल्ड रिजर्व में भारत की मजबूत स्थिति

2026 के आंकड़ों के मुताबिक, RBI के पास लगभग 880 टन सोना है. वहीं State Bank of Pakistan के पास लगभग 64.76 टन सोना मौजूद है. साफ मतलब है कि भारत का सरकारी स्वर्ण भंडार पाकिस्तान के मुकाबले करीब 13 गुना ज्यादा है. 

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खरीदारी में कौन है आगे?

अगर बात करें खरीदारी की तो भारत ने पिछले 5 सालों में अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए 227 टन से ज्यादा सोना खरीदा है. वहीं पाकिस्तान की खरीदारी सीमित रही है और उसकी अर्थव्यवस्था ज्यादा दबाव में होने के कारण बड़े स्तर पर सोना खरीदना आसान नहीं रहा. 

निजी खपत में बड़ा अंतर

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है. यहां हर साल लगभग 700 से 800 टन सोने की खपत होती है. वहीं अगर पाकिस्तान की बात करें तो सालाना सोने की मांग केवल 60 से 90 टन के बीच रहती है.

घरों में कितना सोना?

भारत में परिवारों और मंदिरों के पास लगभग 25 हजार टन सोना होने का अनुमान है. वहीं पाकिस्तान में लोगों के पास करीब 5 हजार टन सोना होने की बात कही जाती है. यानी निजी होल्डिंग्स में भी भारत पाकिस्तान से कई गुना आगे है.

भारत में सोने की इतनी मांग क्यों?

भारत के लोग सोने को सिर्फ इन्वेस्टमेंट नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का हिस्सा मानते हैं. शादी-ब्याह हो या फिर कोई त्योहार यहां सोने की अहम भूमिका होती है. 

पाकिस्तान की क्या स्थिति है?

पाकिस्तान में सोने का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक बाजार के जरिए खरीदा-बेचा जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां लगभग 90 प्रतिशत गोल्ड ट्रेड अनौपचारिक चैनलों से होता है.

भारत के लिए क्यों चिंता की बात?

भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा सोना आयात करता है. इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है, ट्रेड डेफिसिट बढ़ता है और रुपया कमजोर हो सकता है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री की सोने की खरीद को लेकर की गई अपील के पीछे आर्थिक संतुलन बनाए रखने की चिंता भी जुड़ी हुई है. आंकड़े साफ बताते हैं कि सोने के मामले में भारत पाकिस्तान से काफी आगे है.

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