IIT Kanpur: IIT कानपुर के हॉस्टलों में लगेगा नया सेफ्टी सिस्टम, छात्रों को आत्मघाती कदम से रोकने की पहल

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पढ़ाई का दबाव, घर से दूर रहना और भविष्य की चिंता इन सबके बीच छात्रों की सुरक्षा आज बड़ी चिंता बन गई है. इसी को ध्यान में रखते हुए Indian Institute of Technology Kanpur (IIT-K) ने अपने हॉस्टलों में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है. संस्थान ने हॉस्टल के कमरों में लगे सीलिंग फैन में विशेष सुरक्षा उपकरण (सेफ्टी डिवाइस) लगाने का फैसला किया है, ताकि आत्मघाती घटनाओं को रोका जा सके. पिछले दो वर्षों में संस्थान में आत्महत्या की कई घटनाओं के बाद यह निर्णय लिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर के 23 IIT संस्थानों में हुई कुल घटनाओं में करीब 30% मामले अकेले IIT कानपुर से जुड़े रहे हैं.

क्या है नया सिस्टम?

नए सेफ्टी डिवाइस इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि यदि पंखे पर तय सीमा से अधिक वजन डाला जाता है, तो अलार्म बजने लगता है और पंखा खुद नीचे की ओर झुक जाता है. इससे किसी भी प्रकार के खतरनाक प्रयास को रोका जा सकेगा.

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हॉस्टलों में अन्य बदलाव

  • कमरों में लगी लोहे की पाइपें हटाई जा रही हैं, जिनका उपयोग छात्र कपड़े सुखाने के लिए करते थे
  • पुराने 3 हॉस्टल भवनों (करीब 1500 कमरों) में यह काम जारी है
  • सभी 14 हॉस्टलों में धीरे-धीरे ये डिवाइस लगाए जाएंगे

प्रशासन और छात्रों की प्रतिक्रिया

IIT कानपुर के निदेशक प्रो. मनींद्र अग्रवाल ने बताया कि यह फैसला एक बाहरी विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर लिया गया है. उनका कहना है कि संस्थान छात्रों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है और हर संभव कदम उठा रहा है ताकि कैंपस का माहौल सुरक्षित और सकारात्मक बना रहे.

इस कदम पर छात्रों की प्रतिक्रिया अलग-अलग है. कई छात्रों ने इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है. उनका कहना है कि अगर इससे एक भी जान बचती है तो यह प्रयास सफल माना जाएगा. वहीं कुछ छात्रों का मानना है कि केवल तकनीकी उपाय काफी नहीं हैं. उनका कहना है कि असली जरूरत मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई के दबाव और अकेलेपन जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की है. वे चाहते हैं कि संस्थान इस दिशा में और ठोस कदम उठाए.

काउंसलिंग पर भी फोकस

संस्थान ने यह भी साफ किया है कि अब मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इसके लिए 24 घंटे चलने वाली काउंसलिंग हेल्पलाइन शुरू की जा रही है. छात्रों को खुलकर अपनी बात कहने और मदद लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा. प्रशासन का मानना है कि छात्रों से लगातार संवाद, दोस्ताना माहौल और समय पर काउंसलिंग, तनाव को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.

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