Explained: भारत में परीक्षाओं का ‘लीकतंत्र’! 5 सबसे बड़े पेपर लीक कांड और 2 करोड़ छात्रों के सपनों पर पड़ा ग्रहण

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पिछले कुछ सालों में भारत में पेपर लीक की घटनाएं एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या बनकर उभरी हैं. इसने न सिर्फ लाखों युवाओं के करियर पर सवाल खड़े किए है, बल्कि पूरी शिक्षा और भर्ती प्रणाली के भरोसे को भी गहरा धक्का पहुंचाया है. आइए एक नजर डालते हैं ऐसे ही 5 बड़े पेपर लीक कांडों पर, जिन्होंने करीब 2 करोड़ छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया. साल 2013 के व्यापम घोटाले को इस आधुनिक दौर की समस्या की शुरुआत माना जा सकता है. 13 सालों में सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में 100 से ज्यादा पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं, जिनका असर हर साल लगभग 2 करोड़ छात्रों पर पड़ा है. आइए जानते हैं ऐसे ही 5 सबसे बड़े ‘लीकतंत्र’ के बारे में…

1. व्यापम घोटाला: भारत का सबसे बड़ा और खौफनाक पेपर लीक कांड

यह सिर्फ एक पेपर लीक नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, अपराध और सियासत की जड़ों तक फैला एक बड़ा घोटाला था. मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) सरकारी नौकरियों और कॉलेजों में दाखिले के लिए परीक्षाएं आयोजित करता था. 2013 में इस बात का खुलासा हुआ कि नकली परीक्षार्थी (सॉल्वर) दूसरों की जगह परीक्षा दे रहे थे. मोटी रकम के बदले नौकरियां और दाखिले खरीदे जा रहे थे. यह मामला उस समय की शिवराज सिंह चौहान की सरकार पर बड़ा दबाव बन गया था. विपक्ष ने आरोप लगाया कि घोटाला बहत ऊपर तक फैला था, लेकिन सभी आरोप साबित नहीं हो पाए.

  • कितने छात्र प्रभावित: यह आंकड़ा बहुत बड़ा है. कांग्रेस के मुताबिक, इस घोटाले ने 77 लाख छात्रों को प्रभावित किया. 2,000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं और 634 डॉक्टरों की डिग्रियां रद्द करनी पड़ीं.
  • रिजल्ट और खौफ: इस घोटाले से जुड़े 35 से ज्यादा लोगों (गवाह, आरोपी, पत्रकार) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसने इस मामले को और भयावह बना दिया.

 

व्यापम घोटाला भारत के सबसे बड़े भर्ती और प्रवेश परीक्षा घोटालों में से एक माना जाता है
व्यापम घोटाला भारत के सबसे बड़े भर्ती और प्रवेश परीक्षा घोटालों में से एक माना जाता है

2. SSC CGL 2017: जब सुप्रीम कोर्ट ने पूरी भर्ती प्रणाली को ‘दूषित’ करार दिया

यह वह मामला था जिसने देश का ध्यान पेपर लीक की गंभीर समस्या की ओर खींचा था. कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की कम्बाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) 2017 परीक्षा का पेपर परीक्षा शुरू होने से पहले ही सोशल मीडिया पर लीक हो गया था. CBI जांच में पता चला कि कुछ परीक्षा केंद्रों के सुपरवाइजर्स ने अभ्यर्थियों को रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर के जरिए बाहरी मदद दिलवाई. कई सरकारी ज्यादाारी भी इसमें शामिल थे.

  • कितने छात्र प्रभावित: CBI की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परीक्षा के लिए 30.26 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 1,50,404 टियर-1 पास कर चुके थे. कुल मिलाकर लगभग 1.9 लाख छात्र टियर-2 परीक्षा में शामिल हुए और सीधे प्रभावित हुए.
  • रिजल्ट पर असर: इस लीक ने बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन को जन्म दिया. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने अगस्त 2018 में नतीजों पर रोक लगा दी और पूरी परीक्षा प्रणाली को ‘दूषित’ करार दिया. सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मार्च 2018 में प्रभावित 318 केंद्रों के छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की गई.

3. रेलवे भर्ती विवाद 2022: 1.25 करोड़ युवाओं का सड़कों पर उबाल

यह मामला भले ही पारंपरिक पेपर लीक न हो, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर की गड़बड़ी जाहिर करता है. रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने NTPC परीक्षा के पहले चरण (CBT-1) का रिजल्ट जारी किया, जिसमें हाई एकेडमिक क्वालिफिकेशन वाले उम्मीदवारों को निचले स्तर की नौकरियों के लिए शॉर्टलिस्ट कर दिया गया था. उम्मीदवारों का आरोप था कि स्क्रीनिंग टेस्ट के अंकों को अंतिम चयन का आधार बनाकर उनके साथ धोखा किया गया. कई उम्मीदवार एक साथ कई क्षेत्रों से चयनित दिखाए गए, जो नियमों के खिलाफ था.

  • कितने छात्र प्रभावित: PIB की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 1.25 करोड़ छात्र लगभग 35,000 पदों के लिए हुई इस परीक्षा में शामिल हुए थे.
  • रिजल्ट पर असर: इस विवाद के चलते बिहार और उत्तर प्रदेश में हिंसक प्रदर्शन हुए. गया जंक्शन पर एक ट्रेन के कोच में आग लगा दी गई. रेल मंत्रालय को NTPC और लेवल-2 दोनों परीक्षाओं को स्थगित करना पड़ा. सरकार ने चेतावनी दी कि उपद्रव करने वाले अभ्यर्थियों पर आजीवन रेलवे नौकरी पाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा.

 

बिहार और उत्तर प्रदेश में पेपर लीक के आरोप लगे
बिहार और उत्तर प्रदेश में पेपर लीक के आरोप लगे

4. UGC-NET 2024: एक दिन बाद ही रद्द हुई परीक्षा, 9 लाख छात्रों का भविष्य अधर में

PhD और प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे लाखों छात्रों के लिए यह एक जबरदस्त झटका था. 18 जून 2024 को आयोजित UGC-NET परीक्षा के अगले ही दिन शिक्षा मंत्रालय ने इसे रद्द कर दिया. यह कार्रवाई गृह मंत्रालय की एजेंसी (I4C) से मिली खुफिया जानकारी पर की गई. खबर थी कि पेपर डार्कनेट और टेलीग्राम पर लीक होकर बेचा जा रहा था.

  • कितने छात्र प्रभावित: टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परीक्षा में 9.08 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी शामिल हुए थे. हालांकि 11 लाख ने पंजीकरण कराया था.
  • रिजल्ट का सच: लगभग छह महीने बाद जनवरी 2025 में CBI ने इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी. जांच में पाया गया कि एक स्कूली छात्र ने एक ऐप की मदद से लीक हुए प्रश्न पत्र का एक फर्जी स्क्रीनशॉट बनाकर पैसे कमाने के लिए वायरल किया था. यानी, जिसके आधार पर पूरी परीक्षा रद्द की गई, वह लीक ही फर्जी था.

5. NEET-UG 2024: 67 छात्रों का परफेक्ट 720 स्कोर और सुलगते सवाल

यह विवाद पूरे देश में सुर्खियों में रहा और न्यायपालिका तक पहुंचा. झारखंड के हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल के प्रिसिंपल और वाइस प्रिंसिपल ने कर्मचारियों के साथ मिलर प्रश्न पत्र चुराया और लाखों रुपये में बेचा था. इस परीक्षा में 67 छात्रों ने 720 में से 720 अंक पाए थे. 5 सालों (2019-2924) में कुल मिलाकर सिर्फ 8 टॉपर्स हुए थे. 2024 में अकेले 67 छात्र टॉप पर आ गए. ये आंकड़ा अपने आप में चीख-पुकार मचाने के लिए काफी था.

  • कितने छात्र प्रभावित: डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक, परीक्षा में 23 लाख से ज्यादा मेडिकल उम्मीदवार शामिल हुए थे, जो सभी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए. इस मामले में 50 से ज्यादा आरोपी गिरफ्तार किए गए.
  • रिजल्ट पर असर: मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया. हालांकि, ‘ग्रेस मार्क्स’ पाने वाले 1,563 छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी.

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