Adhik Maas 2026: 17 मई से अधिकमास शुरू, विवाह-मुंडन पर विराम लेकिन पूजा-पाठ और दान पुण्यदायी

8bb2b66218b06c972a100418c61402181778818333440466 original


Adhik Maas 2026: अभी ज्येष्ठ मास चल रहा है. इस बार ज्येष्ठ में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) रहेगा यानी ज्येष्ठ एक नहीं, बल्कि दो महीनों तक रहेगा. 16 मई तक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष रहेगा, इसके बाद 17 मई से अधिकमास मास शुरू होगा, जो 15 जून तक चलेगा. इसके बाद ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा, जो कि 29 जून तक रहेगा. अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं.

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि, अधिक मास में भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा खासतौर पर की जाती है. इस महीने को विष्णु जी के ही एक नाम पुरुषोत्तम से भी जाना जाता है. इन दिनों में तीर्थ स्नान, मंदिरों में दर्शन-पूजन, सत्संग, मंत्र जप, दान-पुण्य, पूजन आदि शुभ काम किए जाते हैं. अंग्रेजी कैलेंडर में लीप ईयर होता है और हिन्दी पंचांग में अधिक मास. लीप ईयर में सिर्फ एक दिन बढ़ता है, जबकि अधिक मास से हिन्दी वर्ष में पूरा एक महीना बढ़ जाता है.

दरअसल, ये सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में अंतर की वजह से होता है. इस माह में भगवान शंकर और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से लाभ मिलेगा. अधिक मास में शालीग्राम भगवान की उपासना से भी विशेष लाभ मिलता है. इसलिए हर दिन शालीग्राम भगवान के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें. मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. अधिक मास में श्रीमद्भागवत गीता के 14वें अध्याय का नियमित रूप से पाठ करें. माना जाता है कि ऐसा करने से कार्यक्षेत्र में उत्पन्न हो रही परेशानियां दूर हो जाती है.

अधिक ज्येष्ठ मास

आरंभ: 17 मई 2026

समाप्ति: 15 जून 2026

सामान्य ज्येष्ठ मास

आरंभ: 22 मई 2026

समाप्ति: 29 जून 2026

यानी इस अवधि में दोनों महीने एक-दूसरे के साथ ओवरलैप भी करेंगे.

श्रीहरि को प्रिय है अधिकमास

अधिकमास की गिनती मुख्य महीनों में नहीं होती है. ऐसी कथा है कि जब महीनों के नाम का बंटवारा हो रहा था तब अधिकमास उदास और दुखी था. क्योंकि उसे दुख था कि लोग उसे अपवित्र मानेंगे. ऐसे समय में भगवान विष्णु ने कहा कि अधिकमास तुम मुझे अत्यंत प्रिय रहोगे और तुम्हारा एक नाम पुरुषोत्तम मास होगा जो मेरा ही एक नाम है. इस महीने का स्वामी मैं रहूंगा. उस समय भगवान ने यह कहा था कि इस महीने की गिनती अन्य 12 महीनों से अलग है, इसलिए इस महीने में लौकिक कार्य भी मंगलप्रद नहीं होंगे. लेकिन कुछ ऐसे कार्य हैं जिन्हें इस महीने में किए जाना बहुत ही शुभ फलदायी होगा और उन कार्यों का संबंध मुझसे होगा.

13वां महीना होगा अधिक मास

विक्रम संवत 2083 में ज्येष्ठ का अधिक मास होने से ये साल 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का रहेगा. अधिक मास यानी इस साल ज्येष्ठ का महीना 30 नहीं बल्कि 60 दिनों का होगा. ज्येष्ठ का अधिक मास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा. अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं. धर्म ग्रंथों में इसका विशेष महत्व बताया गया है. इस महीने में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि पर रोक रहती है.

क्यों लगता है मलमास

सूर्य और चंद्र कैलेंडर के बीच का फर्क ही इस अद्भुत महीने को जन्म देता है. सौर वर्ष 365 दिन का होता है और चंद्र वर्ष 354 दिन. यह अंतर हर 32 महीने और 16 दिनों में इतना बढ़ जाता है कि पंचांग को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ना पड़ता है. इसी अतिरिक्त महीने को अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है.

मांगलिक कार्यों से परहेज

परंपराओं में कहा गया है कि मलमास के दौरान विवाह जैसे शुभ संस्कार, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, भूमि पूजन या किसी नए व्यवसाय की शुरुआत नहीं करनी चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्य अपेक्षित फल नहीं देते और ग्रह-नक्षत्र भी मांगलिक कर्मों के अनुकूल नहीं माने जाते. इसी कारण इस पूरे अवधि में बड़े संस्कारों को स्थगित करने की सलाह दी जाती है.

क्यों जरूरी है अधिक मास

हिंदू धर्म में लगभग सभी व्रत त्योहार चंद्रमा की तिथियों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं. चंद्रमा लगभग 29 दिनों में पृथ्वी का एक चक्कर लगाता है, जिसे एक चंद्र मास कहते हैं. जब चंद्रमा पृथ्वी के 12 चक्कर लगा लेता है तो इसे एक चंद्र वर्ष कहते हैं जो लगभग 355 दिन का होता है. वहीं सौर वर्ष 365 का होता है. अगर अधिक मास की व्यवस्था न हो तो हिंदू व्रत-त्योहार हर साल 10 दिन पीछे खिसकते चले जाएंगे, जिससे दिवाली बारिश में और होली शीत ऋतु में मनाई जाने लगेगी. ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही हमारे विद्वानों में अधिक मास की व्यवस्था की है.

सत्यनारायण भगवान की पूजा

अधिकमास में श्रीहरि यानी भगवान विष्णु की पूजा करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. इसलिए अधिकमास में वैसे तो सभी प्रकार के शुभ कार्यों की मनाही होती है. लेकिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करना सबसे शुभफलदायी माना जाता है. अधिकमास में विष्णुजी की पूजा करने से माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में धन वैभव के साथ सुख और समृद्धि आती है.

महामृत्युंजय मंत्र का जप

अधिकमास में ग्रह दोष की शांति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. बेहतर होगा कि आप किसी पुरोहित से संकल्प करवाकर महामृत्युंजय मंत्र का जप करवाएं. ऐसा करने से आपके घर से सभी प्रकार के दोष समाप्त होंगे और आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ेगा.

यज्ञ और अनुष्ठान

अगर आप काफी समय से अपनी किसी मनोकामना को लेकर यज्ञ या अनुष्ठान करवाने के बारे में सोच रहे हैं तो अधिकमास का समय इस कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में करवाए जाने वाले यज्ञ और अनुष्ठान पूर्णत: फलित होते हैं और भगवान अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.

ब्रजभूमि की यात्रा

पुराणों में बताया गया है कि अधिकमास में भगवान विष्णु और उनके सभी अवतारों की पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है. अधिकमास के इन 30 दिनों में अक्सर लोग ब्रज क्षेत्र की यात्रा पर चले जाते हैं.

अधिकमास का महत्व

परमेश्वर श्रीविष्णु द्वारा वरदान प्राप्त मलमास अथवा पुरुषोत्तम मास की अवधि के मध्य श्रीमद्भागवत का पाठ, कथा का श्रवण, श्रीविष्णु सहस्त्रनाम, श्री राम रक्षास्तोत्र, पुरुष सूक्त का पाठ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॐ नमो नारायणाय जैसे मंत्रों का जप करके मनुष्य श्री हरि की कृपा का पात्र बनता है. इस मास में निष्काम भाव से किए गए जप-तप पूजा-पाठ ,दान-पुण्य, अनुष्ठान आदि का महत्व सर्वाधिक रहता है. परमार्थ सेवा, असहाय लोगों की मदद करना, बुजुर्गों की सेवा करना, वृद्ध आश्रम में अन्न वस्त्र का दान करना, विद्यार्थियों को पुस्तक का दान कथा संत महात्माओं को धार्मिक ग्रंथों का दान करना, सर्दियों के लिए ऊनी वस्त्र कंबल आदि का दान करना सर्वश्रेष्ठ फलदाई माना गया है.

इस मास में किए गए जप-तप, दान पुण्य का लाभ जन्म जन्मांतर तक दान करने वाले के साथ रहता है. लगभग तीन वर्षों के अंतराल में पढ़ने वाले इस महापर्व का भरपूर लाभ उठाना चाहिए. जिस चन्द्रवर्ष में सूर्य संक्रांति नहीं पड़ती उसे मलमास कहा गया है जिसका सीधा संबंध सूर्य और चंद्रमा की गति के आधार पर निर्धारित होता है.

दान का खास महत्व

अधिक मास में जरूरतमंद लोगों को अनाज, धन, जूते-चप्पल और कपड़ों का दान करना चाहिए. गर्मी के साथ बीच-बीच में बारिश भी हो रही ऐसे समय में छाते का दान भी कर सकते हैं. किसी मंदिर में शिव जी से जुड़ी चीजें जैसे चंदन, अबीर, गुलाल, हार-फूल, बिल्व पत्र, दूध, दही, घी, जनेऊ आदि का दान कर सकते हैं.

अधिक मास में करें ये शुभ काम

अधिक मास में भगवान विष्णु की विशेष पूजा करनी चाहिए. विष्णु पुराण, श्रीमद् भागवत पुराण, रामायण जैसे ग्रंथों का पाठ करना चाहिए. साधु-संतों के प्रवचन सुनना चाहिए. अपने इष्टदेव के मंत्रों का जप करें. इन दिनों में गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करें. नदी स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं. भगवान शिव का विशेष अभिषेक करें.

शिवलिंग पर चंदन का लेप करें. बिल्व पत्र, धतुरा, आंकड़े के फूल, दही, पंचामृत, शहद आदि चीजें अर्पित करें. धूप-दीप जलाकर भगवान की आरती करें. ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें. घर में विराजित बाल गोपाल का अभिषेक करें. भगवान को माखन-मिश्री और तुलसी चढ़ाएं. कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें. इन दिनों में जूते-चप्पल, कपड़े, अनाज, खाना, तिल, गुड़, तेल, धन का दान करना चाहिए. किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें. गायों को हरी घास खिलाएं.

ये भी पढ़ें: Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत कब है, कितने बजे लगेगी अमावस्या तिथि
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *