बंद रहे होर्मुज, नहीं होगी अब कोई दिक्कत; 400000 करोड़ रुपये के प्लान पर भारत बना रहा फोकस

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  • ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ओमान-गुजरात पाइपलाइन पर तेजी.
  • ₹40,000 करोड़ की 2000 किमी की परियोजना होगी.
  • गहरे समंदर में बिछेगी पाइपलाइन, निर्भरता होगी खत्म.
  • ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी, सालाना ₹7000 करोड़ की बचत.

Hormuz Strait: भारत चाहता है कि ईरान और अमेरिका में जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) की नाकेबंदी का असर उस पर न पड़े . इसके लिए कोशिशें भी लगातार जारी हैं.

इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच खुद को एनर्जी सिक्योरिटी के मामले में और मजबूत करने के लिए ओमान से गुजरात तक 40000 करोड़ का मेगा सबसी (समुद्र के नीचे) गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर काम में तेजी लाई जा रही है. इस रणनीतिक कदम का मकसद खाड़ी देशों के चोक पॉइंट्स पर भारत की निर्भरता को पूरी तरह से खत्म करना है. 

ओमान-गुजरात सबसी पाइपलाइन

40000 करोड़ रुपये के इस सबसी परियोजना के तहत गहरे समंदर में करीब 2000 किलोमीटर लंबी ट्रांसनेशनल पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जो सीधे ओमान को भारत के गुजरात राज्य से जोड़ेगी.

मौजूदा समय में भारत का 40 परसेंट क्रूड ऑयल और 90 परसेंट एलपीजी (LPG) सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के रास्ते होती है, जो फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते बंद है. ऐसे में ओमान-गुजरात सबसी गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट इस विवादित रास्ते को पूरी तरह से बायपास करने में मददगार साबित होगी. 

पूरा होने में कितना लगेगा वक्त?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट पर 40000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इसे पूरा होने में 5-7 साल तक का समय लगेगा. इससे फायदा यह होगा कि भारत को बिना किसी समुद्री और कूटनीतिक रुकावट के सुरक्षित, सस्ती और निरंतर नैचुरल गैस की सीधी सप्लाई होती रहेगी. इसे आज की स्थिति के हिसाब से भारत का एक बैकअप प्लान भी समझ सकते हैं. 

गहरे समंदर में बिछेगी पाइपलाइन 

यह पाइपलाइन समुद्र में 3450 मीटर (लगभग 3.5 किलोमीटर) की गहराई में बिछाई जाएगी, जो इसे दुनिया के सबसे कठिन और गहरे अंडरसी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक बनाती है. यह गैस पाइपलाइन ओमान के तट से शुरू होकर अरब सागर को पार करते हुए सीधे गुजरात के तट से जुड़ेगी. इससे होर्मुज पर निर्भरता खत्म होने के साथ ही पाकिस्तान के जमीनी रास्ते को भी बायपास किया जा सकेगा.

भारत के लिए कितना फायदेमंद यह प्रोजेक्ट? 

बता दें कि भारत लंबे समय ‘तापी’ (TAPI- तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत) गैस पाइपलाइन पर काम कर रहा है, लेकिन आतंकवाद और कूटनीतिक तनाव के चलते यह प्रोजेक्ट दशकों से अधर में लटका हुआ है.  यह पाइपलाइन भारत को रोजाना 31 मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर (mmscmd) प्राकृतिक गैस की निरंतर डिलीवरी करेगी. सीधे पाइपलाइन से गैस आयात करने पर भारत को LNG टैंकरों के मुकाबले प्रति यूनिट 5-6 डॉलर की बचत होगी. इससे देश को सालाना करीब 7000 करोड़ की भारी बचत होगी.

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