अभिनेता पराग त्यागी ने अभिनेत्री शेफाली जरीवाला के निधन को लेकर बड़ा और भावुक बयान दिया. उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्हें कई चीजें बेहद अस्वाभाविक महसूस हुई थीं. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह किसी पर आरोप नहीं लगा रहे हैं और सब कुछ भगवान पर छोड़ चुके हैं.
किस नकारात्मक ऊर्जा की बीत कर रहे हैं पराग त्यागी
आईएएनएस से खास बातचीत में पराग त्यागी से उस बयान को लेकर सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने नकारात्मक ऊर्जा या काले जादू जैसी बातों का जिक्र किया था. उनसे पूछा गया कि आखिर उन्हें ऐसा क्यों महसूस हुआ. इस पर पराग त्यागी ने कहा, ‘कुछ चीजें मुझे बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वाभाविक लगी थीं. हम दोनों अपनी सेहत को लेकर बेहद सजग थे. हर कुछ महीनों में नियमित ब्लड टेस्ट और हेल्थ चेकअप करवाते थे. उस समय मैं आध्यात्मिक रूप से भी काफी जुड़ा हुआ था और भगवान हनुमान की भक्ति में लीन था.’
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क्या पराग को शेफाली की मौत से तीन साल पहले ही पता चल गया था
उन्होंने आगे कहा, ‘उस दौर में मुझे बहुत गहराई से महसूस हुआ था कि कुछ ठीक नहीं है. हालांकि, उस समय मैं उसे पूरी तरह समझ नहीं पाय. लेकिन 2021 से 2024 के बीच मैंने कई चीजों को गहराई से समझना शुरू किया. मुझे व्यक्तिगत तौर पर लगा कि कुछ अस्वाभाविक हुआ था.’
भगवान और भक्ति में लीन रहते हैं पराग त्यागी
पराग त्यागी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी को दोषी नहीं ठहराते. उन्होंने कहा, ‘मैं भगवान, कर्म और सही समय पर भरोसा करता हूं. मैं हर दिन भगवान से जुड़ता हूं, और मेरा मानना है कि जब सही समय आएगा, सच अपने आप सामने आ जाएगा. मैंने सब कुछ भगवान के हाथों में छोड़ दिया है.’
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शेफाली के जाने के गम से कैसे उभरे पराग
जब उनसे पूछा गया कि क्या काम ने इस मुश्किल दौर में उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में मदद की, तो उन्होंने कहा, ‘लोग अक्सर कहते हैं कि खुद को व्यस्त रखो, लेकिन हर समय व्यस्त रहना भी कहीं न कहीं भागने जैसा हो सकता है. कोई इंसान 24 घंटे काम नहीं कर सकता.’
पवित्र रिश्ता और जोधा अकबर जैसे लोकप्रिय शोज में काम कर चुके पराग त्यागी ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा ताकत आध्यात्म और सनातन दर्शन से मिली. उन्होंने कहा, ‘आध्यात्म से जुड़ने पर दर्द खत्म नहीं होता, लेकिन उससे दर्द को सहने की शक्ति जरूर मिलती है. आज की युवा पीढ़ी या तो जरूरत से ज्यादा काम में खो जाती है या फिर भटकाव और इच्छाओं में. असली ताकत आध्यात्म, विश्वास, संस्कृति और भगवान से भीतर के जुड़ाव से आती है, चाहे आप किसी भी धर्म से हों.’