Dual Organ Transplant: एक फैसला और युवक को मिली नई जिंदगी, AIIMS में 18 साल बाद हुआ ड्यूल ऑर्गन ट्रांसप्लांट

85cba2a09c5e01aedb19a072cda25a1317788247451971257 original


AIIMS Dual Organ Transplant After 18 Years: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज दिल्ली में 18 साल बाद एक ऐसी सर्जरी हुई, जिसने 30 साल के युवक को नई जिंदगी दे दी. लंबे समय से टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे इस मरीज की हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि पिछले दो साल से उसे डायलिसिस के सहारे जिंदगी बितानी पड़ रही थी. लेकिन एक ब्रेन डेड डोनर के परिवार के फैसले ने उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी. एम्स में डॉक्टरों ने पहली बार एक साथ पैंक्रियाज और किडनी ट्रांसप्लांट कर मरीज को नया जीवन दिया. 

18 साल बाद हुआ इस तरह का काम

यह ड्यूल ऑर्गन ट्रांसप्लांट एम्स में 18 साल बाद किया गया. मरीज एंड-स्टेज रीनल डिजीज से पीड़ित था, जो लंबे समय से चली आ रही टाइप-1 डायबिटीज की वजह से हुई थी. इस बीमारी में किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती है और मरीज को इंसुलिन के साथ डायलिसिस का सहारा लेना पड़ता है. मरीज को दोनों अंग एक 50 वर्षीय ब्रेन डेड डोनर से मिले, जिनका अंगदान पीजीआई रोहतक में किया गया था.

इसे भी पढ़ें – Heart Fights Cancer: दिल धड़क रहा है यानी कैंसर से लड़ रहा है, नई स्टडी से जागी उम्मीद

ट्रांसप्लांट मरीज के लिए जीवन बदल देने वाला साबित हुआ

एम्स दिल्ली के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. असुरी कृष्णा ने बताया कि यह ट्रांसप्लांट मरीज के लिए जीवन बदल देने वाला साबित हुआ. सर्जरी के बाद अब मरीज को बहुत कम मात्रा में इंसुलिन की जरूरत पड़ रही है. पहले वह ठीक से चल भी नहीं पाता था, लेकिन अब उसकी स्थिति काफी बेहतर है और वह सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है.

किन मरीजों का होता है सिमल्टेनियस पैंक्रियास-किडनी?

डॉक्टरों के मुताबिक, सिमल्टेनियस पैंक्रियास-किडनी यानी एसपीरे उन मरीजों के लिए किया जाता है, जो टाइप-1 डायबिटीज के साथ गंभीर किडनी फेलियर का सामना कर रहे होते हैं. इस प्रक्रिया में एक साथ स्वस्थ पैंक्रियाज और किडनी ट्रांसप्लांट की जाती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि मरीज को डायलिसिस से छुटकारा मिल जाता है और कई मामलों में इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत भी लगभग खत्म हो जाती है.

डॉ. असुरी कृष्णा ने बताया कि एम्स में इस तरह की सर्जरी पिछले 18 सालों से नहीं हुई थी. इसकी बड़ी वजह उत्तर भारत में बेहद कम ऑर्गन डोनेशन और प्रशिक्षित ट्रांसप्लांट सर्जनों की कमी रही.  2008 में पहली सर्जरी के बाद कुछ एक्सपर्ट संस्थान छोड़कर चले गए थे, जिसके बाद नए डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने और सही मरीज की पहचान करने में समय लगा.

टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों की संख्या में इजाफा

एक्सपर्ट का कहना है कि टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों की उम्र अब पहले से ज्यादा बढ़ रही है, जिसकी वजह से ऐसे मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है जिन्हें आगे चलकर किडनी और पैंक्रियाज दोनों के ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है. ऐसे में यह सफल सर्जरी सिर्फ एक मेडिकल उपलब्धि नहीं, बल्कि ऑर्गन डोनेशन की अहमियत का बड़ा उदाहरण भी मानी जा रही है.

इसे भी पढ़ें- Vitamin D Deficiency: क्या बिना बात रहता है बदन दर्द और खराब मूड, कहीं इस विटामिन की कमी से तो नहीं हो रहा ऐसा?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )

Calculate The Age Through Age Calculator



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *