Healthy Aging Test: उम्र बढ़ने के साथ शरीर कितना मजबूत है? 30 सेकंड का ये टेस्ट बताएगा आपकी असली फिटनेस

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Healthy Aging Test: उम्र बढ़ाना एक नेचुरल प्रक्रिया है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ शरीर कितना मजबूत और एक्टिव बना हुआ है, यह जानना भी उतना ही जरूरी है. कई लोग लंबे समय तक हेल्दी और स्वतंत्र जीवन जीना चाहते हैं, लेकिन शरीर के मांसपेशियों में धीरे-धीरे होने वाली कमजोरी इसका सबसे बड़ा संकट बन सकती है. अब वैज्ञानिकों ने एक बहुत आसान तरीका बताया है, जिससे घर बैठे सिर्फ 30 सेकंड में ही शरीर की ताकत और बढ़ती उम्र के असर का अंदाजा लगाया जा सकता है.

जर्नल ऑफ स्पोर्ट एंड हेल्थ साइंस में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, 30 सेकंड का सिट-टू-स्टैंड टेस्ट यह बता सकता है कि किसी व्यक्ति में गिरने, अस्पताल में भर्ती होने या समय से पहले मृत्यु का खतरा कितना है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह टेस्ट मांसपेशियों की ताकत और शरीर की कार्य क्षमता को समझने का आसान तरीका बन सकता है. 

उम्र बढ़ने के साथ क्यों कमजोर होने लगती है मांसपेशियां?

एक्सपर्ट्स के अनुसार बढ़ती उम्र का सबसे ज्यादा असर शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों पर पड़ता है. यह प्रक्रिया 30 साल की उम्र के बाद धीरे-धीरे शुरू होती है और 60 साल के बाद तेजी से बढ़ने लगती है. रिसर्चर्स के अनुसार उम्र बढ़ने पर शरीर की फास्ट ट्वीच मसल फाइबर यानी तेजी से काम करने वाली मांसपेशियां कमजोर होने लगती है. साथ ही तंत्रिका तंत्र भी पहले की तरह मांसपेशियों को एक्टिव नहीं कर पाता. इसके अलावा मांसपेशियों में फैट और अन्य टिश्यू जमा होने लगते हैं, जिससे शरीर की ताकत और मूवमेंट पर असर पड़ता है. 

क्या है 30 सेकंड सिट-टू-स्टैंड टेस्ट?

सिट-टू-स्टैंड टेस्ट बहुत आसान माना जाता है और इसे घर पर भी किया जा सकता है. इसके लिए एक कुर्सी की जरूरत होती है. टेस्ट करने के लिए व्यक्ति को कुर्सी पर बैठना होता है और फिर 30 सेकंड के अंदर जितनी बार संभव हो सके बैठना और खड़ा होना होता है. इस दौरान हाथों को सीने पर क्रॉस करके रखना होता है. इसके बाद उम्र, वजन, लंबाई और कुल रिपीटेशन के आधार पर मांसपेशियों की ताकत का आकलन किया जाता है. 

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रिसर्च में क्या आया सामने?

इस रिसर्च में 65 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के 1876 लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया. जिसमें रिसर्चर्स ने पाया कि जिन लोगों की रिलेटिव एसटीएस पावर कम थी, उनमें कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा ज्यादा देखा गया. पुरुषों में कम मसल पावर वाले लोगों में गिरने और फ्रैक्चर का खतरा ज्यादा पाया गया. वहीं महिलाओं में हिप फ्रैक्चर और गिरने का खतरा ज्यादा देखा गया. स्टडी के अनुसार जिन महिलाओं की मांसपेशियों की ताकत कम थी, उनमें हॉस्पिटल में भर्ती होने का खतरा 29 प्रतिशत ज्यादा था. इतना ही नहीं उन्हें अस्पताल में ज्यादा दिन बिताने पड़े.

रिसर्चर्स ने यह भी पाया कि कम मसल पावर वाले पुरुषों में मृत्यु का खतरा 57 प्रतिशत तक ज्यादा था. वहीं महिलाओं में यह खतरा दोगुने से भी ज्यादा पाया गया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि मांसपेशियों की ताकत सिर्फ फिटनेस का मामला नहीं बल्कि यह शरीर की कुल कार्य क्षमता और हेल्दी जीवन जीने की क्षमता से भी जुड़ी होती है. वहीं डॉक्टर के अनुसार यह टेस्ट बढ़ती उम्र में शरीर की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद कर सकता है. इससे यह पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति की मांसपेशियां कितनी मजबूत है और फ्यूचर में उसे किन हेल्थ से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है.

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