Sugar Export: चीनी पर सरकार टेंशन में क्यों? स्टॉक भरपूर फिर क्यों अपनाया प्रोटेक्शन मोड? जानें निर्यात बैन की वजह

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Sugar Export Banned: भारत में लगातार बढ़ रही महंगाई मार लोगों की जेब तक आ पहुंची है. बाहर से आने वाले क्रूड ऑइल की लगातार बढ़ती कीमत की वजह से ईंधन की कीमतों में भी इजाफा हुआ है. इसी बीच भारत सरकार ने 13 मई को फैसला किया कि अब चीनी के निर्यात पर सितंबर 2026 तक पूरी तरह रोक रहेगी. इसका मतलब है कि अब भारत से चीनी बाहर नहीं भेजी जाएगी, सिर्फ कुछ बहुत कम मात्रा यूरोप और अमेरिका ही जाएगी. क्या इस फैसला असर महंगाई पर रोक लगाएगा या नहीं?

सरकार ने क्यों किया फैसला?
सरकार का ये फैसला महंगाई की मार के बीच आया है, इसके पीछे की वजह अल नीनो बताई जा रही है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अल-नीनो (El Niño) तूफान की वजह से भारत में बारिश कम हो सकती है और गर्मी बढ़ सकती है. जिसकी वजह से अगले साल गन्ने की खेती प्रभावित होने का खतरा है. खासकर 2027-28 की चीनी उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है.

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इसके अलावा मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट के कारण खाद की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. गन्ने की फसल को बहुत पानी और खाद चाहिए होती है. अगर खाद कम मिली तो उत्पादन घट सकता है. इतना ही नहीं फिलहाल सरकार को स्टॉक पर पूरा भरोसा भी नहीं है. कुछ चीनी मिलों के पास जितना स्टॉक बताया जा रहा है, उतना वाकई में है या नहीं इस पर भी सरकार को शक है, इसलिए सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है. कई चीनी कंपनियों के शेयर भी गिरे हैं, ऐसे में सरकार का ये शक भी जाहिर है.

इन चीनी कंपनियों के शेयर गिरे

कंपनी गिरावट (प्रतिशत में)
धामपुर शुगर मिल्स 6.66
द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज 5.88
डालमिया भारत शुगर 5.86
बजाज हिंदुस्तान शुगर मिल्स 5.22
उत्तम शुगर मिल्स 5.08
मवाना शुगर्स 4.18
राजश्री शुगर्स  4.02
श्री रेणुका शुगर्स 2.41

देश में चीनी की स्थिति
2025-26 में भारत में लगभग 279 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान है. पुराने स्टॉक मिलाकर कुल उपलब्धता लगभग 329 लाख टन है. देश की जरूरत लगभग 280 लाख टन है. यानी फिलहाल चीनी की कमी नहीं है. सरकार ने पहले 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी. उसमें से लगभग 6.5 लाख टन चीनी पहले ही बाहर भेजी जा चुकी है. अब आगे कोई नया निर्यात नहीं होगा.

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क्या बढ़ेंगे चीनी के दाम?
फिलहाल घरेलू बाजार में चीनी बेचने पर मिलों को ज्यादा फायदा मिल रहा है. इसलिए वैसे भी एक्सपोर्ट ज्यादा नहीं हो रहा था. बैन लगाने से सरकार ने सिर्फ पूरी तरह रास्ता बंद कर दिया है. सरकार की सबसे बड़ी चिंता ये है कि भविष्य में चीनी की कमी या महंगाई ना बढ़ें, इसलिए पहले से ही सावधानी के तौर पर एक्सपोर्ट रोक दिया है गया है. 



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