CIC Overturns Decision on BCCI: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ नहीं है. आयोग ने कहा कि BCCI न तो सरकार के स्वामित्व में है, न ही उसके नियंत्रण में है. साथ ही, न ही उसे सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलती है.
इसी के साथ सूचना आयोग ने उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें ये जानकारी मांगी गई थी कि BCCI किन प्रावधानों और अधिकारों के तहत भारत का प्रतिनिधित्व करता है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों का चयन करता है.
RBI एक्ट दायरे में नहीं BCCI
CIC ने अपने फैसले में कहा कि BCCI एक निजी, स्वायत्त संस्था है, जो ‘तमिलनाडु सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम’ के तहत पंजीकृत है. इसका गठन न तो संविधान, न संसद और न ही किसी राज्य विधानमंडल द्वारा किया गया है, और न ही यह किसी सरकारी अधिसूचना से बनी बॉडी है.
सूचना आयुक्त पी. आर. रमेश ने आदेश में कहा कि RTI एक्ट की धारा 2(एच) के तहत BCCI को ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, इसलिए इस मामले में आरटीआई एक्ट के प्रावधान उस पर लागू नहीं होते.
सीआईसी ने बदला फैसला
दरअसल, ये फैसला साल 2018 में दिए गए उस आदेश को पलटता है, जिसमें तत्कालीन सूचना आयुक्त और प्रसिद्ध विधि विशेषज्ञ एम. श्रीधर आचार्युलु ने BCCI को ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ माना था. उन्होंने BCCI के अध्यक्ष, सचिव और प्रशासकों की समिति को RTI अधिनियम के तहत केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO), सहायक लोक सूचना अधिकारी (APIO) और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था.
उस समय केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने BCCI को RTI कानून की धारा 4 के तहत स्वेच्छा से जानकारी सार्वजनिक करने और RTI आवेदक को बिंदुवार जवाब देने के भी निर्देश दिए थे. हालांकि, BCCI ने इस आदेश को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी.
अदालत ने सितंबर 2025 में मामले को दोबारा विचार के लिए CIC को वापस भेज दिया. कोर्ट ने कहा था कि BCCI बनाम क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के आलोक में कानूनी स्थिति की फिर से जांच की जाए और उसके बाद नया आदेश पारित किया जाए.