पंखा-बल्ब तो क्या, घर बंद हो तब भी देना पड़ेगा बिजली बिल! लागू हुआ ये प्रस्ताव तो ढीली हो जाएगी जेब

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  • बिजली फिक्स चार्ज बढ़ाने का प्रस्ताव, घर बंद होने पर भी देना होगा शुल्क।
  • कंपनियों के नुकसान की भरपाई हेतु फिक्स चार्ज में बढ़ोतरी का सुझाव।
  • रूफटॉप सोलर से बिजली कंपनियों की कमाई घट रही है।
  • घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिक्स चार्ज 25% तक बढ़ाने की योजना।

Electricity News: पेट्रोल, डीजल और CNG के बढ़ते दामों से पहले ही आम आदमी परेशान है. अब बिजली बिल को लेकर भी बड़ा झटका लग सकता है. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसके लागू होने पर लोगों को हर महीने ज्यादा फिक्स चार्ज देना पड़ सकता है. यानी अगर आपके घर में पंखा-बल्ब तक न चले, घर पर ताला लगा हो, तब भी बिजली बिल का एक हिस्सा भरना ही पड़ेगा. 

आखिर क्या है पूरा मामला?

अभी बिजली बिल दो हिस्सों में आता है. पहला- जितनी यूनिट बिजली खर्च हुई उसका चार्ज और दूसरा- फिक्स चार्ज. फिक्स चार्ज वह रकम होती है, जो हर महीने तय होती है, चाहे बिजली कम इस्तेमाल हो या ज्यादा. अब CEA चाहता है कि इस फिक्स चार्ज को बढ़ाया जाए ताकि बिजली कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके. रिपोर्ट के मुताबिक बिजली कंपनियों का बड़ा खर्च बिजली नेटवर्क, ट्रांसमिशन लाइन, कर्मचारियों की सैलरी और रखरखाव पर होता है. लेकिन उनकी कमाई का छोटा हिस्सा ही फिक्स चार्ज से आता है.

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घर बंद हो तब भी देना होगा पैसा

इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. अगर यह नियम लागू हो जाता है, तो कम बिजली खर्च करने वालों को भी हर महीने मोटा फिक्स चार्ज देना पड़ सकता है. मान लीजिए कोई व्यक्ति नौकरी या छुट्टियों के कारण एक महीने घर से बाहर है. अभी तक उसका बिल कम आता था क्योंकि बिजली खर्च नहीं हुई. लेकिन नए सिस्टम में घर बंद होने के बावजूद फिक्स चार्ज देना पड़ेगा. यही वजह है कि लोग इसे नो यूज, फिर भी बिल वाला सिस्टम कह रहे हैं.

आखिर बिजली कंपनियों को क्यों पड़ रही जरूरत?

दरअसल, देश में तेजी से रूफटॉप सोलर का इस्तेमाल बढ़ रहा है. बड़ी संख्या में लोग अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाकर खुद बिजली बना रहे हैं. इससे बिजली कंपनियों से खरीदी जाने वाली बिजली कम हो रही है. CEA का कहना है कि कंपनियों को फिर भी पूरा नेटवर्क तैयार रखना पड़ता है, क्योंकि जरूरत पड़ने पर यही उपभोक्ता सरकारी ग्रिड का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में कंपनियों की कमाई घट रही है लेकिन खर्च कम नहीं हो रहा.

किस पर कितना असर पड़ेगा?

प्रस्ताव के मुताबिक घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए फिक्स चार्ज को कुल लागत का 25 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है. वहीं फैक्ट्री, मॉल और बड़े कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए इसे 2030 तक 100 फीसदी तक ले जाने की बात कही गई है. यानी आने वाले समय में बिजली बिल का बड़ा हिस्सा “फिक्स” हो सकता है और यूनिट खर्च का हिस्सा कम.

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मध्यम वर्ग की बढ़ सकती है टेंशन

पहले ही महंगाई, EMI और रोजमर्रा के खर्च से परेशान मध्यम वर्ग के लिए यह प्रस्ताव चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है. खासकर उन परिवारों पर ज्यादा असर पड़ सकता है जो बिजली की बचत करके बिल कम रखने की कोशिश करते हैं. हालांकि अभी ये सिर्फ प्रस्ताव है और इसे लागू करने पर अंतिम फैसला रेगुलेटरी संस्थाएं लेंगी. लेकिन अगर यह लागू हुआ, तो आने वाले दिनों में बिजली बिल लोगों के घरेलू बजट पर बड़ा असर डाल सकता है. 



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