Havan Vidhi: सुबह का शांत माहौल, घी और कपूर की हल्की खुशबू, मंत्रों की धीमी आवाज और हवन कुंड से उठती अग्नि भारतीय परंपरा में हवन एक धार्मिक प्रक्रिया है. आज भी कई लोग नए घर में प्रवेश, किसी शुभ काम की शुरुआत या परिवार की सुख-शांति के लिए हवन करवाते हैं. लेकिन बदलते समय के साथ लोग हवन तो करना चाहते हैं, लेकिन सही विधि नहीं जानते है.
कई बार बिना जानकारी के की गई छोटी गलतियां पूरी पूजा का असर कम कर देती हैं. पारंपरिक हवन पद्धति में हर छोटी चीज को महत्व दिया गया है. हवन केवल आग में सामग्री डालने की प्रक्रिया नहीं है, इसका संबंध श्रद्धा, शुद्धता और सही विधि से माना जाता है.
हवन से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
हवन शुरू करने से पहले सबसे जरूरी है पूजा की जगह को साफ और शांत रखना. पारंपरिक विधि में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ जाता है. इसके बाद हवन कुंड स्थापित किया जाता है. हवन सामग्री में आमतौर पर घी, कपूर, हवन सामग्री, आम की लकड़ी, फूल, कलश, दीपक, दूर्वा, पान, कुशा और चावल जैसी चीजें रखी जाती हैं.
कलश स्थापना
हवन शुरू करने से पहले पारंपरिक विधि में स्थान, कलश और देवताओं की स्थापना को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. सबसे पहले ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में गणेश, लक्ष्मी, चौसठ योगिनी और गौरी आदि देवियों का स्मरण करके स्थापना की जाती है. इसके बाद कलश स्थापित कर उसके ऊपर नारियल रखा जाता है और दीपक जलाया जाता है.
फिर पूजा शुरू करने से पहले सभी पूजा सामग्री और वस्तुओं पर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है. इस दौरान शुद्धि मंत्र बोला जाता है
“ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यंतरः शुचिः॥”
मान्यता है कि इस मंत्र के उच्चारण से वातावरण और मन दोनों की शुद्धि होती है.
गणेश पूजन
भगवान गणेश की कृपा और विघ्नों को दूर करने के लिए यह मंत्र बोला जाता है
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी को याद करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और पूजा शांतिपूर्वक पूरी होती है.
अग्नि प्रज्वलित करने की सही विधि
हवन कुंड में सबसे पहले छोटी लकड़ियां और कपूर रखा जाता है. फिर धीरे-धीरे अग्नि जलाई जाती है. जब अग्नि स्थिर हो जाती है, तब घी की पहली आहुति(हवन कुंड में हवन सामग्री को डालना) दी जाती है. इस दौरान सामान्य रूप से यह मंत्र बोला जाता है
“ॐ अग्नये स्वाहा”
इसके बाद हवन सामग्री अग्नि में डाली जाती है. हर आहुति के अंत में “स्वाहा” बोलना जरूरी माना जाता है, क्योंकि स्वाहा अग्नि देव की पत्नी का नाम है. बिना अपनी पत्नी के नाम के अग्नि देव आहुति स्वीकार नहीं करते है.
आहुति देते समय क्यों बोले जाते हैं मंत्र?
हवन में मंत्रों का विशेष महत्व बताया गया है. मंत्रों की ध्वनि मन को शांत और एकाग्र करती है. पुराने समय में ऋषि-मुनि यज्ञ और हवन में उच्चारण की शुद्धता पर बहुत ध्यान देते थे. अगर आपको पूरे वैदिक मंत्र न आते हों, तो भी श्रद्धा के साथ छोटा हवन किया जा सकता है. कई लोग गायत्री मंत्र के साथ भी आहुति देते हैं
“ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात् स्वाहा”
इस मंत्र के साथ दी गई आहुति मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करती है.
अंत में शांति और मंगलकामना के लिए यह मंत्र बोला जाता है
“ॐ शांति: शांति: शांति:”
माना जाता है कि इस मंत्र के साथ पूजा का समापन करने से घर में सकारात्मक और शांत वातावरण बना रहता है.
हवन के दौरान इन बातों का ध्यान रखें:
- हवन हमेशा हवादार जगह पर करें
- बहुत ज्यादा धुआं न होने दें
- प्लास्टिक या गलत चीजें अग्नि में न डालें
- छोटे बच्चों को अकेले हवन कुंड के पास न बैठाएं
- पूजा के दौरान मोबाइल और शोर-शराबे से दूर रहें
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