Why Do People Vomit While Travelling: कुछ लोगों को कार, बस, ट्रेन या नाव में बैठते ही उल्टी जैसा महसूस होने लगता है. कई लोगों को सफर शुरू होने के कुछ ही मिनटों में चक्कर, घबराहट, पसीना और जी मिचलाने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. आम भाषा में इसे मोशन सिकनेस कहा जाता है. यह समस्या बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी को भी हो सकती है और कई बार पूरा सफर खराब कर देती है.
क्या होती है यह दिक्कत?
हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली संस्था clevelandclinic के मुताबिक, यह परेशानी तब होती है जब आंखें, कान और शरीर दिमाग को अलग-अलग संकेत भेजने लगते हैं. उदाहरण के तौर पर, जब कोई व्यक्ति कार में बैठा होता है तो उसकी आंखें बाहर पेड़, सड़क और इमारतों को तेजी से गुजरते हुए देखती हैं, जिससे दिमाग को लगता है कि शरीर लगातार मूव कर रहा है. लेकिन अंदरूनी कान और मांसपेशियां यह संकेत देती हैं कि शरीर स्थिर है. दिमाग इन उलझे हुए संकेतों को समझ नहीं पाता और इसी वजह से मोशन सिकनेस शुरू हो जाती है.
क्या सिर्फ ट्रेवल करते समय होती है यह दिक्कत?
रिसर्च के अनुसार, मोशन सिकनेस सिर्फ सफर के दौरान ही नहीं, बल्कि वीडियो गेम और वर्चुअल रियलिटी गेम खेलते समय भी हो सकती है. इसे वर्चुअल मोशन सिकनेस कहा जाता है. इस दौरान भी आंखें और दिमाग अलग-अलग तरह की जानकारी प्रोसेस करते हैं, जिससे चक्कर और उल्टी जैसी परेशानी हो सकती है.
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मोशन सिकनेस में क्या होती है दिक्कत?
मोशन सिकनेस के सामान्य लक्षणों में चक्कर आना, सिरदर्द, थकान, ठंडा पसीना, ज्यादा लार बनना, तेज सांस चलना और उल्टी शामिल हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि 2 से 12 साल के बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. इसके अलावा माइग्रेन, गर्भावस्था, पार्किंसन बीमारी या अंदरूनी कान से जुड़ी दिक्कत वाले लोगों में भी इसका खतरा ज्यादा होता है.
इससे बचने के लिए क्या हैं उपाय?
डॉक्टरों के मुताबिक, मोशन सिकनेस से बचने के लिए सफर के दौरान कुछ आसान उपाय मददगार हो सकते हैं. जैसे गाड़ी में आगे की सीट पर बैठना, खिड़की के पास बैठकर ताजी हवा लेना और मोबाइल या किताब देखने की बजाय दूर की चीजों पर नजर रखना. कई लोगों को अदरक वाली चाय या पुदीने की कैंडी खाने से भी राहत मिलती है. एक्सपर्ट यह भी बताते हैं कि सफर से पहले बहुत भारी खाना या शराब पीने से परेशानी बढ़ सकती है. इसलिए हल्का और सादा भोजन करना बेहतर माना जाता है. इसके साथ ही शरीर में पानी की कमी न हो, इसका भी ध्यान रखना चाहिए. कुछ मामलों में डॉक्टर एंटीहिस्टामिन दवाइयां या स्पेशल पैच इस्तेमाल करने की सलाह भी देते हैं, जो उल्टी और जी मिचलाने की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.