Iran War Impact: न गैस सिलेंडर, न कच्चा माल… उद्यमियों का बुरा हाल, सरकार ने मांगा विशेष राहत पैकेज

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देश के तमाम राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों पर ईरान-इज़राइल युद्ध का बुरा असर पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश में कानपुर के दादा नगर स्थित औद्योगिक क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा. कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी और ट्रांजिट टाइम बढ़ने से यहां की इंडस्ट्री गंभीर संकट से गुजर रही है.

यूरोप में निर्यात करने वाले निर्यातक संदीप मल्होत्रा ने बताया कि उनके कारोबार में 180 से 210 दिन का कमिटमेंट रहता है, लेकिन लगातार बढ़ती लागत के कारण उन्होंने 15 मार्च से नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है. पॉलिएस्टर यार्न, कॉटन और अन्य कपड़ों के दाम रोज बढ़ रहे हैं. पुराने ऑर्डर अभी पुराने रेट पर पूरे किए जा रहे हैं, लेकिन आगे नए रेट लागू करना मजबूरी होगी. ट्रांजिट टाइम बढ़ने और रूट बदलने से निर्यात लागत भी बढ़ गई है.

‘अब ब्लैक में भी नहीं मिल रहा सिलेंडर’

टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े मयंक बिज के अनुसार, उनकी इंडस्ट्री में कच्चा माल 25 से 30 प्रतिशत तक महंगा हो गया है. स्पेशलाइज्ड लेबर बाहर से आती है, लेकिन गैस सिलेंडर न मिलने से मजदूर खाना नहीं बना पा रहे और वापस लौट रहे हैं. सिलेंडर की किल्लत इतनी है कि ब्लैक में भी उपलब्ध नहीं है. बढ़ती लागत के कारण उत्पादन लागत और बाजार भाव में तालमेल नहीं बैठ पा रहा है.

उद्योगपति विजय कपूर का कहना है कि दादा नगर में करीब 2500 इंडस्ट्री हैं. वर्तमान हालात में 50 प्रतिशत इंडस्ट्री महज 10 से 20 प्रतिशत क्षमता पर चल रही हैं, 30 प्रतिशत इंडस्ट्री 50 से 60 प्रतिशत क्षमता पर और केवल 20 प्रतिशत इंडस्ट्री 80 प्रतिशत क्षमता तक काम कर पा रही हैं. किसी के पास रॉ मटेरियल नहीं है, किसी के पास लेबर की कमी है तो किसी के पास गैस सिलेंडर नहीं है. उनका कहना है कि हालात कोरोना काल से भी बदतर हो चुके हैं.

प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित

बता दें कि दादा नगर में मसाला, रोलिंग मिल, बिस्किट, प्लास्टिक, पैकेजिंग, एक्सपोर्ट, साइकिल पार्ट्स और फूड इंडस्ट्री समेत विभिन्न इकाइयां संचालित होती हैं. प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां 100 रुपए का कच्चा माल 180 रुपए तक पहुंच गया है. केमिकल इंडस्ट्री में 100 रुपए का माल 200 रुपए का हो गया है, जबकि लोहे के दाम में करीब 20 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है.

उद्योगपतियों का कहना है कि जब तक गैस सिलेंडर की नियमित आपूर्ति और कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक हालात सामान्य नहीं होंगे. विजय कपूर ने प्रशासन से मार्च माह के टैक्स और रिकवरी टारगेट स्थगित करने, हाउस टैक्स, वॉटर टैक्स, बिजली बिल और जीएसटी में राहत देने की मांग की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

व्यापारियों ने सीएम योगी से मांगी मदद

व्यापारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष पैकेज की मांग की है. उनका कहना है कि जिस तरह प्राकृतिक आपदा में किसानों को राहत दी जाती है, उसी तरह उद्योगों को भी विशेष सहायता दी जाए, ताकि फैक्ट्रियां बंद होने से बच सकें और रोजगार व राजस्व दोनों सुरक्षित रहे.



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