AITWA का बड़ा फैसला: माल ढुलाई दरों में FAF लागू, डीजल महंगा होने पर बढ़ेगा फ्रेट

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  • ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने FAF लागू किया है.
  • बढ़ती ईंधन लागत व वैश्विक तनाव से परिचालन महंगा.
  • डीजल दाम के अनुसार माल ढुलाई दरें बढ़ेंगी.
  • ट्रांसपोर्ट सेक्टर को स्थिर रखने यह ज़रूरी कदम.

Fuel Adjustment Factor: देशभर के ट्रांसपोर्टरों के संगठन All India Transporters’ Welfare Association यानी AITWA ने माल ढुलाई की दरों में Fuel Adjustment Factor यानी FAF लागू करने का ऐलान किया है. संगठन का कहना है कि वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों की वजह से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है जिसके चलते ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री की लागत बहुत बढ़ गई है.

डीजल की बढ़ती कीमतें बनीं बड़ी वजह

AITWA के मुताबिक 15 मई 2026 से डीजल के दामों में तेज उछाल आया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास पाबंदियों और वैश्विक तनाव की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है. इसके अलावा भारतीय रुपये पर बढ़ते दबाव से कच्चे तेल के आयात की लागत भी काफी ऊपर चली गई है. कई जगहों पर डीजल पंपों पर कमी की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे ट्रकों की आवाजाही पर सीधा असर पड़ रहा है.

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संगठन ने बताया कि पिछले दो महीनों में DEF यानी AdBlue की कीमतें करीब दोगुनी हो चुकी हैं. टायर के दाम भी लगभग पांच फीसदी बढ़ चुके हैं. इसके साथ ही 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में टोल शुल्क में भी बढ़ोतरी हो चुकी है. AITWA का कहना है कि ट्रांसपोर्ट की कुल परिचालन लागत में डीजल का हिस्सा करीब 65 फीसदी होता है इसलिए मौजूदा फ्रेट कॉन्ट्रैक्ट्स में इन बढ़ी हुई लागतों को जोड़ना अब जरूरी हो गया है.

क्या है FAF का फॉर्मूला

AITWA ने FAF के तहत एक सीधा फॉर्मूला तय किया है. 15 मई 2026 की डीजल कीमत को बेस मानते हुए इसके बाद डीजल में हर एक रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर फ्रेट रेट में 0.65 फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी. संगठन ने साफ किया है कि यह FAF सिर्फ बढ़ी हुई ईंधन लागत की भरपाई के लिए है इससे ट्रांसपोर्टरों को कोई अलग से मुनाफा नहीं होगा.

AITWA ने व्यापार और उद्योग संगठनों से अपील की है कि 20 मई 2026 से लागू इस FAF को सामान्य सालाना बढ़ोतरी की तरह न देखा जाए बल्कि इसे एक असाधारण वैश्विक लागत समायोजन के तौर पर माना जाए. संगठन ने यह भी याद दिलाया कि सड़क परिवहन भारत की सप्लाई चेन की रीढ़ है और इस मुश्किल दौर में उद्योग का साथ बेहद जरूरी है.

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