Exclusive: रोहित शेट्टी फायरिंग केस, चार्जशीट में बड़ा खुलासा, गैंग को कायम रखना था अपना वर्चस्व

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मशहूर बॉलीवुड फिल्म निर्माता और निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर पर फायरिंग की घटना को 31 जनवरी की आधी रात अंजाम दिया गया था. मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम एंटी-एक्सटॉर्शन सेल कर रही थी. ऐसे में एंटी-एक्सटॉर्शन सेल की ओर से रोहित शेट्टी की घर पर फायरिंग केस में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें पुलिस जांच में यह साफ हो गया है कि इस वारदात को अंजाम देने के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ी एक टीम का हाथ था. उनका मुख्य उद्देश्य मुंबई शहर में अपना खौफ और वर्चस्व कायम रखना था.

क्या है पूरा मामला?

चार्जशीट में बताया गया कि ये घटना 31 जनवरी की रात और 1 फरवरी 2026 की तड़के सुबह 00:30 से 00:45 बजे के बीच की है. रोहित शेट्टी के जुहू स्थित निवास स्थान (शेट्टी टॉवर) पर तैनात उनके एक पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड की शिकायत पर जुहू पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था.

घटना के वक्त एक अज्ञात हमलावर ने रोहित शेट्टी को जान से मारने के उद्देश्य से उनके घर पर अंधाधुंध फायरिंग की थी. शुरुआत में जुहू पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय हथियार कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच एंट-एक्सटॉर्शन सेल को सौंप दी गई.

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जांच में मकोका (MCOCA) कानून के तहत कार्रवाई

पुलिस की जांच, गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी विश्लेषण के बाद इस मामले में एक के बाद एक कड़ियां जुड़ती गईं. जांच में यह साबित हुआ कि यह कोई साधारण फायरिंग नहीं थी, बल्कि एक संगठित अपराध था. इसके बाद, सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेकर 11 फरवरी 2026 को इस मामले में कड़ा मकोका कानून (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999) की धारा 3(1)(ii), 3(2), और 3(4) को जोड़ा गया. इस मामले में अब तक 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.

चार्जशीट में हुए कई बड़े खुलासे

इसके साथ ही कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में कई बड़े खुलासे भी हुए. शुभम लोणकर और आरजू बिश्नोई इस फायरिंग के मास्टरमाइंड थे. पुलिस ने अपनी चार्जशीट में आरोपी शुभम रामेश्वर लोणकर और नवीन कुमार, दलित कुमार उर्फ आरजू बिश्नोई को मुख्य वांटेड  आरोपी बताया है. चार्जशीट में ये भी बताया गया है कि शुभम लोणकर ने ही रोहित शेट्टी के घर हुए फायरिंग में शामिल पूरी संगठित आपराधिक ग्रुप का निर्माण किया था.

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सोशल मीडिया पर ली थी जिम्मेदारी 

फायरिंग की घटना के तुरंत बाद 1 फरवरी 2026 को आरोपियों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. पोस्ट में लिखा गया था, ‘आज जो ये मुंबई में रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग हुई इसकी जिम्मेदारी लेते हैं. आगे से पूरी बॉलीवुड को चेतावनी है टाइम रहते सुधर जाओ नहीं तो बाबा सिद्दीकी जैसा हाल करेंगे.’

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रेकी के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल 

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी नंबर 6 और 7 ने जुहू इलाके और रोहित शेट्टी के घर की रेकी करने के लिए ‘कल्याण’ के एक गेस्ट हाउस में रुकने के लिए फर्जी आधार कार्ड और झूठे नामों का सहारा लिया था. इतना ही नहीं, उन्होंने गाड़ी के इंजन और चेसिस नंबर पर भी मिटा दिए थे. वारदात के लिए एक मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किया गया था, जिसका नंबर एमएच-12, एफएन-2205 बताया जा रहा है. इसकी जब आरटीओ (ताड़देव, मुंबई) के जरिए जांच कराई गई, तो पता चला कि आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए गाड़ी के इंजन और चेसिस नंबर को पूरी तरह खुरच कर मिटा दिया था.

हथियारों और पैसों की सप्लाई 

वांटेड आरोपी आरजू बिश्नोई और शुभम लोणकर ने ही शूटरों को आग्नेयास्त्र (पिस्तौल) और जिंदा कारतूस मुहैया कराए थे. इसके अलावा, शूटरों और मददगारों को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए आर्थिक मदद (फंडिंग) भी ट्रांसफर की गई थी.

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मोबाइल और सिम कार्ड किए नष्ट 

वारदात को अंजाम देने के बाद पकड़े जाने के डर से आरोपियों को अपने मोबाइल और सिम कार्ड पूरी तरह से नष्ट करने के लिए उकसाया गया था, ताकि पुलिस को कोई तकनीकी सबूत न मिल सके. हालांकि, पुलिस ने डिलीटेड डेटा और सीडीआर (CDR) के जरिए पुख्ता सबूत जुटा लिए हैं.

अदालत में पुख्ता सबूत पेश

मुंबई पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से कुछ ने सक्षम प्राधिकारी के सामने अपना कन्फेशन स्टेटमेंट भी दर्ज कराया है, जो मकोका कानून के तहत अदालत में बेहद अहम सबूत माना जाता है. इसके अलावा, फॉरेंसिक लैब (कालीना, मुंबई) की बैलिस्टिक रिपोर्ट से भी यह साबित हो चुका है कि बरामद हथियारों से ही रोहित शेट्टी के घर पर गोलियां चलाई गई थीं.





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