UPI के 10 साल: सब्जी वाले से शोरूम तक, ऐसे बदला भारत का पेमेंट अंदाज, विदेश में भी बजा डंका

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UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस, ने लोगों की जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है. अब हर जगह एटीएम लेकर जाने की जरूरत नहीं है. ना ही मोटा कैश लेकर कहीं जाने की जरूरत है. केवल हाथ में मोबाइल लिया और निकल पड़े. ये है यूपीआई का कमाल और इस कमाल को अब भारत में पूरे 10 साल हो गए हैं. UPI ने भारत को डिजिटल भारत बना दिया है, इतना ही नहीं इसने भारत को दुनियाभर की डिजिटल पेमेंट्स की दुनिया में एक अलग ही मुकाम दे दिया है.

ग्लोबली रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में हिस्सेदारी
यूपीआई के 10 साल पूरे होने पर सरकार ने कुछ आंकड़े जारी किए हैं, इसी के साथ बताया है कि डिजिटल पेमेंट्स की दुनिया में वैश्विक रूप से क्या हिस्सेदारी रही है. सरकार के अनुसार ग्लोबली रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में भारत की 49% की हिस्सेदारी है. ये बताता है कि हमारा देश कितनी तेजी से तरक्की कर रहा है और आगे बढ़ रहा है.

जनवरी 2026 में हुए ट्रांजेक्शन
डिजिटल पेमेंट्स पर ही हर कोई इस समय डिपेंडेंट है. जनवरी 2026 में ही यूपीआई के जरिए 21.70 अरब ट्रांजेक्शन हुए है. जिनकी कुल वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपए रही. भारत में कुल रिटेल डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो इसकी पॉपुलैरिटी और ज़रूरत के बारे में बताता है. इंटरनेशनल मोनेटरी फंड IMF ने यूपीआई को दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है. खास बात ये है कि इसे 10 साल से भी कम समय में विकसित किया गया, और इस दौरान इसमें 12,000 गुना से ज्यादा ट्रांजेक्शन वॉल्यूम और 4,000 गुना से ज्यादा वैल्यू की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

सब्जी वाले से रिक्शावाले तक कर रहे इस्तेमाल
UPI की असली ताकत सिर्फ इसके आंकड़े ही नहीं बल्कि इसका लोगों के द्वारा किया जा रहा उपयोग भी है. सब्जी- फल वाले, ऑटो रिक्शा, दुकानदार, बड़े से बड़े शोरूम वालों के साथ ही आम लोग जो खरीदारी करने जाते हैं वो भी यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं. शहरें हों या ग्रामीण क्षेत्र हर जगह पर इसका इस्तेमाल हो रहा है. इसने लोगों के जीवन को काफी आसान बना दिया है. इसलिए हर किसी ने इसे बढ़ावा ही दिया है.

अंतरराष्ट्रीय हुआ दायरा
यूपीआई ने केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपना डका बजाया है. ये सिस्टम सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर जैसे देशों तक भी पहुंच गया है. जिससे क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन और रेमिटेंस आसान हो गए हैं. सरकार का मानना है, यूपीआई अब सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं रहा, बल्कि ये एक व्यापक फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है.



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