तेहरान से इस्लामाबाद तक बढ़ी सुरक्षा, लड़ाकू विमानों की निगरानी और कूटनीतिक हलचल के बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है. वह नाम है ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ. वे उस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं, जिसे अमेरिका के साथ अहम बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है. माना जा रहा है कि यह पहल संघर्ष विराम को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकती है.
रिपोर्ट्स के अनुसर जब यह ईरानी दल पाकिस्तान पहुंचा, तो इस्लामाबाद के नूर खान एयरबेस पर सुरक्षा के खासा इंतजाम थे. पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया और राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने की पुष्टि की. इसी बीच आइए जानते हैं आखिर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ कितने पढ़े-लिखे हैं, जिन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है.
गालिबाफ की एजुकेशन की बात करें तो उन्होंने तरबियात मोदारेस यूनिवर्सिटी से वर्ष 2001 में पॉलिटिकल जियोग्राफी में पीएचडी की. यह विषय देशों की सीमाओं, संसाधनों, भूगोल और राजनीति के रिश्ते को समझने में मदद करता है जो अंतरराष्ट्रीय वार्ता में बहुत काम आता है. इससे पहले उन्होंने ह्यूमन जियोग्राफी में मास्टर्स की डिग्री इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी से प्राप्त की और ग्रेजुएशन यूनिवर्सिटी ऑफ तेहरान से इसी विषय में किया.
राजनीति में भी चर्चा
मोहम्मद बाघेर गालिबाफ का राजनीतिक सफर भी काफी चर्चित रहा है. जितनी उनकी पढ़ाई. साल 2005 से 2017 तक तेहरान के मेयर रहे. इस दौरान उन्होंने शहर में सड़क, पुल, ट्रैफिक व्यवस्था और शहरी विकास पर खास ध्यान दिया. राजधानी की ढांचागत सुविधाओं को बेहतर बनाने के कई प्रोजेक्ट उनके कार्यकाल में आगे बढ़े. गालिबाफ ने चार बार राष्ट्रपति पद के लिए भी चुनाव लड़ा- 2005, 2013, 2017 और 2024. हालांकि हर बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी राष्ट्रीय पहचान और सियासी मौजूदगी लगातार बनी रही.
ले चुके हैं पायलट की ट्रेनिंग
पार्लियामेंट स्पीकर बनने से पहले वे 2017 से 2020 तक Expediency Discernment Council के सदस्य रहे. इस दौरान वे सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी कॉउन्सिल से भी जुड़े रहे, जहां देश की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर काम होता है. उनकी पहचान सिर्फ पढ़ाई और राजनीति तक सीमित नहीं है. गालिबाफ एक प्रशिक्षित पायलट भी हैं और कुछ एयरबस विमानों के लिए प्रमाणित प्रशिक्षण ले चुके हैं. ईरान और अमेरिका के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं. ऐसे में बातचीत के लिए चुने गए प्रतिनिधि की समझ, धैर्य और रणनीतिक सोच बहुत मायने रखती है.
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