Iran on Hormuz Vessels: अमेरिका-ईरान युद्ध विराम के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. रूस की सरकारी न्यूज़ एजेंसी ‘तास’की ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि अब ईरान एक दिन में होर्मुज से सिर्फ 15 जहाजों को गुजरने की मंजूरी देगा. ईरान के इस फैसले से भारत में एलपीजी और कच्चे तेज की सप्लाई पर असर पड़ सकता है. सीमित आवाजाही के ईरान के इस फैसले ने अब वैश्विक ट्रांसपोर्टरों की चिंता भी बढ़ा दी है.
भारत सरकार का क्या कहना है?
देश में एलीपी, क्रूड ऑयल और रसायन प्रोडेक्ट की सप्लाई को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि सरकार देश में एलीपी संकट से लड़ने की कोशिशें कर रही है. फिलहाल देश में एलपीजी गैस सिलेंडर्स की आपूर्ति सुचारू रूप से बनी हुई है. मंत्रालय ने जानकारी दी कि देश में हर दिन 58 लाख से ज्यादा घरेलू एलपीजी सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं. इतना ही नहीं कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर्स की उपलब्धता को भी बढ़ा दिया गया है, जो अब करीब 70 फीसदी तक पहुंच गई है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने मीडिया को बताया कि देश में एक दिन के भीतर 6 हजार 700 टन कमर्शियल एलपीजी की बिक्री हुई, जो लगभग 3.5 लाख सिलेंडर्स के बराबर है. इतना ही नहीं इस दौरान पांच किलो वाले करीब 1.06 लाख सिलेंडर भी बेचे गए.
इतना अहम क्यों है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
ईरान और ओमान के बीच समंदर का एक छोटा सा हिस्सा है, जिसे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ कहा जाता है. यह पानी की एक पतली पट्टी जैसी है, जिसकी चौड़ाई सिर्फ 34 किलोमीटर है, लेकिन इसकी अहमियत इतनी ज्यादा है कि इसे दुनिया की ‘आर्थिक नस’ माना जाता है. यह रास्ता खाड़ी के देशों को हिंद महासागर से जोड़ता है. पूरी दुनिया में जितना भी कच्चा तेल सप्लाई होता है, उसका पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. सिर्फ तेल ही नहीं, खेती के लिए जरूरी उर्वरक और अन्य जरूरी सामान भी इसी समुद्री रास्ते से दुनिया भर में पहुंचते हैं.
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