
सबसे पहला कदम है अपनी सीमाएं तय करना. यह किसी को दूर धकेलना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि आप किस तरह की बातों को अपने दिमाग में जगह देना चाहते हैं. अगर बातचीत बहुत नेगेटिव हो जाए, तो बिना अपराधबोध के अभी मैं इस पर बात नहीं कर सकता कहना बिल्कुल ठीक है.