- ईरान-अमेरिका तनाव से एलपीजी आपूर्ति पर चिंताएं बढ़ीं.
- सरकार ने कहा, एलपीजी आपूर्ति सामान्य, अफवाहों पर ध्यान न दें.
- घरेलू सिलेंडरों की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई है.
- कॉमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई.
- तेल कंपनियों को अभी भी हो रहा भारी नुकसान.
LPG Cylinder Rate Today on May 29: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते दुनिया भर में एनर्जी की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. भारत में भी लोगों ने अब LPG और पेट्रोलियम उत्पादों की संभावित कमी या कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंताएं करनी शुरू कर दी है. हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट कह दिया है कि देश में घरेलू LPG की आपूर्ति में फिलहाल कोई कमी नहीं है और इसका वितरण सामान्य रूप से जारी है.
अधिकारियों ने लोगों से यह भी आग्रह किया है कि वे गैस की उपलब्धता को लेकर फैल रही अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही घबराएं. इस बीच, भारत के कई शहरों में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों की LPG कीमतों में काफी अंतर बना हुआ है क्योंकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम मार्च में सिर्फ 60 रुपये बढ़ाए गए थे, जबकि मई की पहली तारीख को कमर्शियल सिलेडर की कीमतों में सीधे 993 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी.
शहरवार गैस सिलेंडर की कीमतें
| शहर | घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें | कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें |
| दिल्ली | 913.0 रुपये | 3071.5 रुपये |
| मुंबई | 912.5 रुपये | 3024.0 रुपये |
| कोलकाता | 939.0 रुपये | 3202.5 रुपये |
| चेन्नई | 928.5 रुपये | 3237.0 रुपये |
| बेंगलुरु | 915.5 रुपये | 3152.0 रुपये |
| अहमदाबाद | 920.0 रुपये | 3091.0 रुपये |
| अगरतला | 073.5 रुपये | 3415.5 रुपये |
| अमृतसर | 954.0 रुपये | 3178.0 रुपये |
| भोपाल | 918.5 रुपये | 3077.0 रुपये |
तेल कंपनियों को अब भी घाटा
बता दें कि पिछले 15 दिनों में पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने LPG गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका बढ़ा दी है. इसकी वजह यह है कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारी नुकसान झेल रही हैं. तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने इस महीने पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ाई हैं, जिससे कुल मिलाकर प्रति लीटर लगभग 7.5 रुपये की बढ़ोतरी हुई है.
सोमवार को केंद्र सरकार ने बताया कि हाल ही में ईंधन की कीमतें बढ़ाने के बावजूद सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों को अभी भी हर दिन लगभग 600 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, “पहले तेल मार्केटिंग कंपनियों को हर दिन 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, लेकिन हाल ही में कीमतें बढ़ाने के बाद भी नुकसान अभी भी 600 करोड़ रुपये से थोड़ा ही कम है.”
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